पतझड़ के बाद ही ऋतुराज बसंत में,
जीवन-पथ पर; नए फूल खिले।
संघर्ष करने के बाद ही जीवन में
सफलता का सुख मिले।
आगे बढ़, मजबूती से रख;
जीवन की डगर पर पांव।
उतार-चढ़ाव, सुख-दुख हैं;
जीवन की धूप-छांव।
उचित समय आने पर तरुवर फूले- फले।
पूर्णिमा का मधुर चांद
गगन में धीरे-धीरे चले।
सुंदर-सुगंधित फूल, गुलशन में खिले।
मन-मंदिर में खुशियों के दीप जले।
- अध्यापक (शिक्षक) होना केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देना भी होता है। जब सेवा जीवन का उद्देश्य बन जाती है, तब शिक्षा सच में समाज के लिए वरदान बन जाती है।
- कवि और साहित्यकार अपने रचना-कर्म से देश-विदेश में लोकप्रिय होते हैं।
- कवि की कविताओं में समय और समाज की धड़कनें सुनाई देती हैं।
- मूर्ति केवल पत्थर नहीं होती। यह आस्था और चेतना का प्रतीक होती है।
-घनिष्ठ हंस, पलवल
मो. 9599737902
