अखिल विश्व पाल क्षत्रिय समाज, क्यों आप अपनी गौरवशाली विरासतों को भूलने की कोशिश में ये महत्वपूर्ण तथ्य भी भुला दे रहे हो कि इस पवित्र भारत भूमि की सनातन संस्कृति के वास्तविक सूत्रधार आप ही हो। जरा याद करो जर्मन के महान दार्शनिक मैक्समूलर ने घोषित किया है कि भारत के वेद तो गड़रियों के गाए गीत हैं। भगवान शिव का मल्हारी मार्तन्ड अवतार तो महाराष्ट्र के धनगर समाज के बीच ही हुआ। कौन भुला सकता है भगवान दत्तात्रेय के त्रिदेव अवतार को? उत्तर व पूर्व में महान पाल साम्राज्य, पश्चिम में प्रतिहार बघेल, दक्षिण में पल्ल्वी गणराज्य आपके पूर्वजों के द्वारा स्थापित अति गौरवशाली ध्वजा चिन्ह हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र के कोने-कोने में सनातन धर्म की कीर्तिमई धर्मध्वजा को अपने साहस व धर्मनिष्ठता से फहराने वाली लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती को सारे राष्ट्र ने उल्लास से मनाया। आज उनके द्वारा स्थापित ऐतिहासिक, धार्मिक व पुरातात्विक महत्व की बेमिसाल धरोहरों व विरासतों की सुरक्षा को कुछ स्वार्थी तत्वों की साज़िश के कारण गंभीर खतरा पैदा कर डाला गया है। ऐसी विषम परिस्थितियों में होल्कर शाही परम्परा को लम्बे अरसे से गंभीरतापूर्वक निभाते आ रहे श्रीमंत सनातन वीर उदयराजे सिंह होल्कर राज परिवार के सदस्य होने के कारण वर्षों से निभाते आ रहे हैं, जिन्हें जानबूझकर देवी अहिल्या माँ साहब के नाम पर गठित खासगी ट्रस्ट में शामिल नहीं किया गया है। अब राष्ट्र ही नहीं अखिल विश्व स्तर पर प्रतिनिधि महासभा का आयोजन 28 दिसम्बर को प्रातः 11 बजे से हिंदी भवन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किया जा रहा है। सभी पाल, बघेल होल्कर, धनगर, गायरी, देवासी, गाडरी, गड़रिया, कुरुबा, कुरुम्बन आदि से विनम्र निवेदन है कि माँ अहिल्या साहिब की विराट धरोहर को बचाने के स्वाभिमान के साथ ग़ज़ियाबाद में 28 दिसम्बर को अवश्य पधारने की कृपा करें व महाराज श्रीमंत उदयराजे सिंह होल्कर को तिलक व पगड़ी प्रदान किये जाने के गौरवशाली समारोह के साक्षी बनें।
-विजय सिंह पाल, अध्यक्ष, अखिल विश्व पाल क्षत्रिय महासभा
मो. 9548489681
अपनी गौरवशाली विरासतों को बचाने के लिए आगे आए अखिल विश्व पाल क्षत्रिय समाज!
अपनी गौरवशाली विरासतों को बचाने के लिए आगे आए अखिल विश्व पाल क्षत्रिय समाज!
अखिल विश्व पाल क्षत्रिय समाज, क्यों आप अपनी गौरवशाली विरासतों को भूलने की कोशिश में ये महत्वपूर्ण तथ्य भी भुला दे रहे हो कि इस पवित्र भारत भूमि की सनातन संस्कृति के वास्तविक सूत्रधार आप ही हो। जरा याद करो जर्मन के महान दार्शनिक मैक्समूलर ने घोषित किया है कि भारत के वेद तो गड़रियों के गाए गीत हैं। भगवान शिव का मल्हारी मार्तन्ड अवतार तो महाराष्ट्र के धनगर समाज के बीच ही हुआ। कौन भुला सकता है भगवान दत्तात्रेय के त्रिदेव अवतार को? उत्तर व पूर्व में महान पाल साम्राज्य, पश्चिम में प्रतिहार बघेल, दक्षिण में पल्ल्वी गणराज्य आपके पूर्वजों के द्वारा स्थापित अति गौरवशाली ध्वजा चिन्ह हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र के कोने-कोने में सनातन धर्म की कीर्तिमई धर्मध्वजा को अपने साहस व धर्मनिष्ठता से फहराने वाली लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती को सारे राष्ट्र ने उल्लास से मनाया। आज उनके द्वारा स्थापित ऐतिहासिक, धार्मिक व पुरातात्विक महत्व की बेमिसाल धरोहरों व विरासतों की सुरक्षा को कुछ स्वार्थी तत्वों की साज़िश के कारण गंभीर खतरा पैदा कर डाला गया है। ऐसी विषम परिस्थितियों में होल्कर शाही परम्परा को लम्बे अरसे से गंभीरतापूर्वक निभाते आ रहे श्रीमंत सनातन वीर उदयराजे सिंह होल्कर राज परिवार के सदस्य होने के कारण वर्षों से निभाते आ रहे हैं, जिन्हें जानबूझकर देवी अहिल्या माँ साहब के नाम पर गठित खासगी ट्रस्ट में शामिल नहीं किया गया है। अब राष्ट्र ही नहीं अखिल विश्व स्तर पर प्रतिनिधि महासभा का आयोजन 28 दिसम्बर को प्रातः 11 बजे से हिंदी भवन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किया जा रहा है। सभी पाल, बघेल होल्कर, धनगर, गायरी, देवासी, गाडरी, गड़रिया, कुरुबा, कुरुम्बन आदि से विनम्र निवेदन है कि माँ अहिल्या साहिब की विराट धरोहर को बचाने के स्वाभिमान के साथ ग़ज़ियाबाद में 28 दिसम्बर को अवश्य पधारने की कृपा करें व महाराज श्रीमंत उदयराजे सिंह होल्कर को तिलक व पगड़ी प्रदान किये जाने के गौरवशाली समारोह के साक्षी बनें।
-विजय सिंह पाल, अध्यक्ष, अखिल विश्व पाल क्षत्रिय महासभा
मो. 9548489681
