Wednesday, March 4, 2026

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आइए, एक आवाज में कहें—रेणके आयोग लागू हो!

रेणके आयोग क्या है और कब से है?
रेणके आयोग कर्नाटक सरकार द्वारा बनाया गया एक सरकारी आयोग था। इस आयोग का गठन वर्ष 2006 में किया गया था और इसकी रिपोर्ट 2008 में सरकार को सौंपी गई। इस आयोग के अध्यक्ष थे न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रघुनाथ राव रेणके। इसी कारण इसे रेणके आयोग कहा जाता है।
रेणके आयोग क्यों बनाया गया?
रेणके आयोग इसलिए बनाया गया क्योंकि सरकार ने यह महसूस किया कि गडरिया / पाल /धनगर / कुरुबा / बघेल जैसे चरवाहा-आधारित समाज शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सामाजिक विकास में बहुत पीछे रह गए हैं, इन समाजों की साक्षरता दर कम है, आर्थिक स्थिति कमजोर है, सरकारी योजनाओं का लाभ बहुत कम मिला है। इसलिए सरकार ने एक आयोग बनाकर वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन कराया।
रेणके आयोग ने क्या माना और क्या सिफारिश की?
रेणके आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि गडरिया/पाल/धनगर/कुरुबा जैसे समाज वास्तव में पिछड़े हुए हैं, इन्हें विशेष संरक्षण और आरक्षण की जरूरत है। अगर इन समाजों को शिक्षा में आगे बढ़ाना है तो आरक्षण और विशेष योजनाएं जरूरी हैं। आयोग का मकसद था-आने वाली पीढ़ियों को बराबरी का अवसर देना, किसी को छोटा या अछूत बनाना नहीं।
समाज को क्या समझाना जरूरी है?
आप सबको यह बात कहना जरूरी है कि रेणके आयोग कोई भीख नहीं है, यह हमारे समाज की वास्तविक स्थिति पर सरकार द्वारा किया गया अध्ययन है। शिक्षा में हिस्सेदारी मिलेगी तो हमारी आने वाली पीढ़ी अफसर, शिक्षक और वैज्ञानिक बनेगी। अगर आप सभी गडरिया समुदाय एक हो जाएं तो ये हो सकता है। आज मैं आपसे दिल से एक बात कहना चाहता हूँ- रेणके आयोग कोई कागजी रिपोर्ट नहीं है, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद है। रेणके आयोग ने पहली बार देश के सामने यह सच्चाई रखी कि घुमंतू और मेहनतकश समाज शिक्षा, सम्मान और अवसर से पीछे रह गए हैं। यह स्वीकार किया गया कि यह पिछड़ापन हमारी गलती नहीं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा का परिणाम है। अगर रेणके आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो हमारे बच्चे स्कूल से नहीं छूटेंगे, कॉलेज और उच्च शिक्षा तक पहुँचेंगे, सरकारी नौकरी और अच्छे पदों तक रास्ता खुलेगा, समाज आत्मनिर्भर और सम्मानित बनेगा। रेणके आयोग हमारे बच्चों के हाथ में कलम देने की चाबी है। आज जो लोग कहते हैं कि ‘इससे कुछ नहीं होगा’, उन्हें याद रखना चाहिए—हर बड़ा बदलाव पहले जागरूकता से ही शुरू होता है। अगर आज हम रेणके आयोग को समझेंगे, उसके लिए एकजुट होंगे, तो कल हमारी आने वाली पीढ़ी हम पर गर्व करेगी। आखिरी बात, रेणके आयोग हमारे लिए नहीं, हमारे बच्चों के भविष्य के लिए है। आज हमारा समर्थन—कल उनकी तरक्की। आइए, एक आवाज में कहें—रेणके आयोग लागू हो। गड़रिया समाज आगे बढ़े।
अमन पाल, सहारनपुर
प्रदेश अध्यक्ष युवा पाल समाज सेवा एवं उत्थान समिति उत्तर प्रदेश
मो. 7351666215

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आइए, एक आवाज में कहें—रेणके आयोग लागू हो!

रेणके आयोग क्या है और कब से है?
रेणके आयोग कर्नाटक सरकार द्वारा बनाया गया एक सरकारी आयोग था। इस आयोग का गठन वर्ष 2006 में किया गया था और इसकी रिपोर्ट 2008 में सरकार को सौंपी गई। इस आयोग के अध्यक्ष थे न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रघुनाथ राव रेणके। इसी कारण इसे रेणके आयोग कहा जाता है।
रेणके आयोग क्यों बनाया गया?
रेणके आयोग इसलिए बनाया गया क्योंकि सरकार ने यह महसूस किया कि गडरिया / पाल /धनगर / कुरुबा / बघेल जैसे चरवाहा-आधारित समाज शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सामाजिक विकास में बहुत पीछे रह गए हैं, इन समाजों की साक्षरता दर कम है, आर्थिक स्थिति कमजोर है, सरकारी योजनाओं का लाभ बहुत कम मिला है। इसलिए सरकार ने एक आयोग बनाकर वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन कराया।
रेणके आयोग ने क्या माना और क्या सिफारिश की?
रेणके आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि गडरिया/पाल/धनगर/कुरुबा जैसे समाज वास्तव में पिछड़े हुए हैं, इन्हें विशेष संरक्षण और आरक्षण की जरूरत है। अगर इन समाजों को शिक्षा में आगे बढ़ाना है तो आरक्षण और विशेष योजनाएं जरूरी हैं। आयोग का मकसद था-आने वाली पीढ़ियों को बराबरी का अवसर देना, किसी को छोटा या अछूत बनाना नहीं।
समाज को क्या समझाना जरूरी है?
आप सबको यह बात कहना जरूरी है कि रेणके आयोग कोई भीख नहीं है, यह हमारे समाज की वास्तविक स्थिति पर सरकार द्वारा किया गया अध्ययन है। शिक्षा में हिस्सेदारी मिलेगी तो हमारी आने वाली पीढ़ी अफसर, शिक्षक और वैज्ञानिक बनेगी। अगर आप सभी गडरिया समुदाय एक हो जाएं तो ये हो सकता है। आज मैं आपसे दिल से एक बात कहना चाहता हूँ- रेणके आयोग कोई कागजी रिपोर्ट नहीं है, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद है। रेणके आयोग ने पहली बार देश के सामने यह सच्चाई रखी कि घुमंतू और मेहनतकश समाज शिक्षा, सम्मान और अवसर से पीछे रह गए हैं। यह स्वीकार किया गया कि यह पिछड़ापन हमारी गलती नहीं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा का परिणाम है। अगर रेणके आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो हमारे बच्चे स्कूल से नहीं छूटेंगे, कॉलेज और उच्च शिक्षा तक पहुँचेंगे, सरकारी नौकरी और अच्छे पदों तक रास्ता खुलेगा, समाज आत्मनिर्भर और सम्मानित बनेगा। रेणके आयोग हमारे बच्चों के हाथ में कलम देने की चाबी है। आज जो लोग कहते हैं कि ‘इससे कुछ नहीं होगा’, उन्हें याद रखना चाहिए—हर बड़ा बदलाव पहले जागरूकता से ही शुरू होता है। अगर आज हम रेणके आयोग को समझेंगे, उसके लिए एकजुट होंगे, तो कल हमारी आने वाली पीढ़ी हम पर गर्व करेगी। आखिरी बात, रेणके आयोग हमारे लिए नहीं, हमारे बच्चों के भविष्य के लिए है। आज हमारा समर्थन—कल उनकी तरक्की। आइए, एक आवाज में कहें—रेणके आयोग लागू हो। गड़रिया समाज आगे बढ़े।
अमन पाल, सहारनपुर
प्रदेश अध्यक्ष युवा पाल समाज सेवा एवं उत्थान समिति उत्तर प्रदेश
मो. 7351666215

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