Wednesday, March 4, 2026

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महादेव जानकर : महाराष्ट्र से देश के कोने-कोने तक पहुँचा नेतृत्व!

राष्ट्रीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महादेव जानकर साहेब का कार्य केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। पूरे देश में उन्होंने जिस निष्ठावान कार्यकर्ता-शक्ति को खड़ा किया है, वह उनसे कितना आत्मीय प्रेम करती है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव मुझे हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश दौरे में हुआ। प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या दर्शन के लिए मैं मित्रों के साथ उत्तर प्रदेश पहुँचा। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश की धरती ने भी जानकर साहब को लगातार भरपूर प्रेम दिया है। इस क्षेत्र में उनके द्वारा आयोजित कई जनसभाएँ और मोर्चे बड़े पैमाने पर सफल रहे हैं। लेकिन इन सभी सफलताओं के पीछे जो निःस्वार्थ समर्पण दिखाई देता है, उसका जीवंत उदाहरण हैं जानकर साहेब के निष्ठावान कार्यकर्ता-सुशील कुमार। महाराष्ट्र छोड़ने के बाद मुझे सुशील कुमार की याद आई। सहज भाव से मैंने फोन कर पूछा, “सुशील कुमारजी, आप गाँव में हैं क्या? मैं प्रयागराज आ रहा हूँ।” यह सुनते ही उन्होंने आत्मीयता से कहा, “अब आप आ ही रहे हैं तो दो दिन हमारे यहाँ रुकना ही पड़ेगा।” इन शब्दों में छिपा अपनापन मन को छू गया। प्रयागराज में हमारा पहला प्रवास था। वहाँ एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय समाज पार्टी के प्रयागराज जिला अध्यक्ष सत्यजीत पाल, संयोजक रामलाल पाल, चंद्रभान नामदेव, शिवसमुदर पाल सहित अनेक कार्यकर्ता हमारे स्वागत के लिए उपस्थित थे। वे सभी जानकर साहेब और उनके कार्यों के बारे में पूरे गर्व और अपनत्व से बात कर रहे थे। उस क्षण ऐसा लगा मानो हम अपने ही परिवार के लोगों के बीच हों। प्रयागराज से आगे हम वाराणसी की ओर रवाना हुए। इसी मार्ग पर जौनपुर के लाल बाजार क्षेत्र में सुशील कुमार का गाँव और खेती-बाड़ी है। वहाँ पहुँचने पर सुशील कुमार के साथ-साथ जानकर साहेब से निःस्वार्थ प्रेम करने वाले डॉ. सुरेश, अनिल कुमार, दीपक कुमार, दशरथ यादव तथा मित्र-परिवार पंचवटी स्वीट्स, मसीदा में एकत्रित हुआ था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। हर कार्यकर्ता जानकर साहेब के बारे में श्रद्धा और गर्व से बोल रहा था। “साहेब बड़े होने चाहिएं, साहेब के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं,” यह भावना उनके शब्दों में साफ झलक रही थी। महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से निकलकर महादेव जानकर साहेब आज देश के कोने-कोने में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सामान्य कार्यकर्ताओं की जो मजबूत श्रृंखला पूरे देश में खड़ी की है, उसका अनुभव मुझे इस उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान बार-बार हुआ। अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को दरकिनार कर, देश के वंचित, उपेक्षित और सामान्य वर्ग के युवाओं को सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने का जो संकल्प लेकर वे कार्य कर रहे हैं, वह निस्संदेह हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में घूमते समय भी मुझे जानकर साहेब के नाम का प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस हुआ। महाराष्ट्र की मिट्टी में जन्मा यह हीरा आज देश के हर कोने में अपने कार्य की चमक बिखेर रहा है। महादेव जानकर साहेब के नेतृत्व और कार्यक्षमता का प्रभाव क्या है, यह महाराष्ट्र से बाहर निकलने के बाद ही वास्तविक रूप में समझ में आता है। मेरे जैसे जानकर साहेब के एक विश्वासपात्र सहयोगी के अपने क्षेत्र में आने मात्र से कार्यकर्ताओं के चेहरों पर जो खुशी दिखाई दी, वह अविस्मरणीय थी। जब मेरे लिए इतना स्नेह है, तो गरीब-गुरबों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के रूप में जानकर साहेब के प्रति उनके दिलों में कितना अथाह प्रेम होगा, इसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। सामान्य कार्यकर्ताओं को आत्मबल देने वाले महादेव जानकर साहेब तथा उनके निष्ठावान कार्यकर्ता साथियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

संजय बारहाते (पत्रकार), पुणे, महाराष्ट्र

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महादेव जानकर : महाराष्ट्र से देश के कोने-कोने तक पहुँचा नेतृत्व!

राष्ट्रीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महादेव जानकर साहेब का कार्य केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। पूरे देश में उन्होंने जिस निष्ठावान कार्यकर्ता-शक्ति को खड़ा किया है, वह उनसे कितना आत्मीय प्रेम करती है, इसका प्रत्यक्ष अनुभव मुझे हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश दौरे में हुआ। प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या दर्शन के लिए मैं मित्रों के साथ उत्तर प्रदेश पहुँचा। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश की धरती ने भी जानकर साहब को लगातार भरपूर प्रेम दिया है। इस क्षेत्र में उनके द्वारा आयोजित कई जनसभाएँ और मोर्चे बड़े पैमाने पर सफल रहे हैं। लेकिन इन सभी सफलताओं के पीछे जो निःस्वार्थ समर्पण दिखाई देता है, उसका जीवंत उदाहरण हैं जानकर साहेब के निष्ठावान कार्यकर्ता-सुशील कुमार। महाराष्ट्र छोड़ने के बाद मुझे सुशील कुमार की याद आई। सहज भाव से मैंने फोन कर पूछा, “सुशील कुमारजी, आप गाँव में हैं क्या? मैं प्रयागराज आ रहा हूँ।” यह सुनते ही उन्होंने आत्मीयता से कहा, “अब आप आ ही रहे हैं तो दो दिन हमारे यहाँ रुकना ही पड़ेगा।” इन शब्दों में छिपा अपनापन मन को छू गया। प्रयागराज में हमारा पहला प्रवास था। वहाँ एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय समाज पार्टी के प्रयागराज जिला अध्यक्ष सत्यजीत पाल, संयोजक रामलाल पाल, चंद्रभान नामदेव, शिवसमुदर पाल सहित अनेक कार्यकर्ता हमारे स्वागत के लिए उपस्थित थे। वे सभी जानकर साहेब और उनके कार्यों के बारे में पूरे गर्व और अपनत्व से बात कर रहे थे। उस क्षण ऐसा लगा मानो हम अपने ही परिवार के लोगों के बीच हों। प्रयागराज से आगे हम वाराणसी की ओर रवाना हुए। इसी मार्ग पर जौनपुर के लाल बाजार क्षेत्र में सुशील कुमार का गाँव और खेती-बाड़ी है। वहाँ पहुँचने पर सुशील कुमार के साथ-साथ जानकर साहेब से निःस्वार्थ प्रेम करने वाले डॉ. सुरेश, अनिल कुमार, दीपक कुमार, दशरथ यादव तथा मित्र-परिवार पंचवटी स्वीट्स, मसीदा में एकत्रित हुआ था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। हर कार्यकर्ता जानकर साहेब के बारे में श्रद्धा और गर्व से बोल रहा था। “साहेब बड़े होने चाहिएं, साहेब के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं,” यह भावना उनके शब्दों में साफ झलक रही थी। महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से निकलकर महादेव जानकर साहेब आज देश के कोने-कोने में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सामान्य कार्यकर्ताओं की जो मजबूत श्रृंखला पूरे देश में खड़ी की है, उसका अनुभव मुझे इस उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान बार-बार हुआ। अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को दरकिनार कर, देश के वंचित, उपेक्षित और सामान्य वर्ग के युवाओं को सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने का जो संकल्प लेकर वे कार्य कर रहे हैं, वह निस्संदेह हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में घूमते समय भी मुझे जानकर साहेब के नाम का प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस हुआ। महाराष्ट्र की मिट्टी में जन्मा यह हीरा आज देश के हर कोने में अपने कार्य की चमक बिखेर रहा है। महादेव जानकर साहेब के नेतृत्व और कार्यक्षमता का प्रभाव क्या है, यह महाराष्ट्र से बाहर निकलने के बाद ही वास्तविक रूप में समझ में आता है। मेरे जैसे जानकर साहेब के एक विश्वासपात्र सहयोगी के अपने क्षेत्र में आने मात्र से कार्यकर्ताओं के चेहरों पर जो खुशी दिखाई दी, वह अविस्मरणीय थी। जब मेरे लिए इतना स्नेह है, तो गरीब-गुरबों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के रूप में जानकर साहेब के प्रति उनके दिलों में कितना अथाह प्रेम होगा, इसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। सामान्य कार्यकर्ताओं को आत्मबल देने वाले महादेव जानकर साहेब तथा उनके निष्ठावान कार्यकर्ता साथियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

संजय बारहाते (पत्रकार), पुणे, महाराष्ट्र

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