मध्य प्रदेश में निवासरत विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति वर्ग की अधिकांश जातियां आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ेपन का सामना कर रही हैं। वर्षों से यह वर्ग मुख्यधारा के विकास से वंचित रहा है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इन समाजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अनेक बार कल्याण की बातें तो होती हैं, परंतु वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी परिस्थितियों में समय की मांग है कि यह पूरा वर्ग संगठित होकर अपने अधिकारों और सम्मान के लिए एकजुट हो। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 2023 में ‘विमुक्त एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति महासंघ’ का गठन किया गया। इस संगठन के संस्थापक सदस्य ज्ञानसिंह, जी.एस., मधुसूदन एवं राजूसिंह हैं, जिन्होंने समाज को संगठित करने का संकल्प लेकर यह पहल प्रारंभ की। आज महासंघ मध्य प्रदेश की 51 जातियों को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है। संगठन का विस्तार प्रदेश के 55 जिलों में है, साथ ही अन्य राज्यों में भी इसके पदाधिकारी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज के आत्मसम्मान, अधिकार और विकास का अभियान है। महासंघ मध्य प्रदेश में चार प्रमुख शाखाओं के माध्यम से कार्य कर रहा है— 1. कोर कमेटी, 2. युवा शक्ति शाखा, 3. नारी शक्ति शाखा, 4. विद्यार्थी शक्ति शाखा। प्रत्येक जिले में इन चारों शाखाओं की अपनी-अपनी टीम कार्यरत है, जो शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का दायित्व निभा रही हैं। संगठन के माध्यम से अनेक जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन किसी न किसी रूप में समाज के व्यक्तियों की सहायता की जा रही है—चाहे वह दस्तावेज संबंधी मार्गदर्शन हो, छात्रवृत्ति की जानकारी, रोजगार के अवसर या अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास। फिर भी, जब तक यह पूरा वर्ग व्यापक स्तर पर एकजुट नहीं होगा, तब तक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण संभव नहीं है। यदि समाज संगठित नहीं होगा, तो वह केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग होता रहेगा। कल्याण की घोषणाएं होंगी, लेकिन वास्तविक कल्याण अधूरा ही रहेगा। आज आवश्यकता है जागरूकता, संगठन और सहभागिता की। प्रत्येक समाज बंधु, युवा, महिला और विद्यार्थी को आगे आकर इस महासंघ से जुड़ना चाहिए, ताकि आने वाले समय में हमारा समाज अपनी मजबूत राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित कर सके और विकास की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्थान प्राप्त कर सके। एकजुटता ही शक्ति है। जब 51 जातियां एक मंच पर संगठित होंगी, तब परिवर्तन अवश्य संभव होगा। यह केवल संगठन से जुड़ने का आह्वान नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने का संकल्प है। आइए, हम सब मिलकर अपने अधिकार, सम्मान और विकास के लिए एकजुट हों। तभी इस वर्ग का वास्तविक कल्याण सुनिश्चित हो सकेगा।
—पटेल मधुसूदन धनगर
राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं कार्यालय प्रभारी
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति महासंघ
मो. 9826536032
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति एकजुट हो!
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति एकजुट हो!
मध्य प्रदेश में निवासरत विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति वर्ग की अधिकांश जातियां आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ेपन का सामना कर रही हैं। वर्षों से यह वर्ग मुख्यधारा के विकास से वंचित रहा है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इन समाजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अनेक बार कल्याण की बातें तो होती हैं, परंतु वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी परिस्थितियों में समय की मांग है कि यह पूरा वर्ग संगठित होकर अपने अधिकारों और सम्मान के लिए एकजुट हो। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 2023 में ‘विमुक्त एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति महासंघ’ का गठन किया गया। इस संगठन के संस्थापक सदस्य ज्ञानसिंह, जी.एस., मधुसूदन एवं राजूसिंह हैं, जिन्होंने समाज को संगठित करने का संकल्प लेकर यह पहल प्रारंभ की। आज महासंघ मध्य प्रदेश की 51 जातियों को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है। संगठन का विस्तार प्रदेश के 55 जिलों में है, साथ ही अन्य राज्यों में भी इसके पदाधिकारी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज के आत्मसम्मान, अधिकार और विकास का अभियान है। महासंघ मध्य प्रदेश में चार प्रमुख शाखाओं के माध्यम से कार्य कर रहा है— 1. कोर कमेटी, 2. युवा शक्ति शाखा, 3. नारी शक्ति शाखा, 4. विद्यार्थी शक्ति शाखा। प्रत्येक जिले में इन चारों शाखाओं की अपनी-अपनी टीम कार्यरत है, जो शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का दायित्व निभा रही हैं। संगठन के माध्यम से अनेक जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन किसी न किसी रूप में समाज के व्यक्तियों की सहायता की जा रही है—चाहे वह दस्तावेज संबंधी मार्गदर्शन हो, छात्रवृत्ति की जानकारी, रोजगार के अवसर या अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास। फिर भी, जब तक यह पूरा वर्ग व्यापक स्तर पर एकजुट नहीं होगा, तब तक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण संभव नहीं है। यदि समाज संगठित नहीं होगा, तो वह केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग होता रहेगा। कल्याण की घोषणाएं होंगी, लेकिन वास्तविक कल्याण अधूरा ही रहेगा। आज आवश्यकता है जागरूकता, संगठन और सहभागिता की। प्रत्येक समाज बंधु, युवा, महिला और विद्यार्थी को आगे आकर इस महासंघ से जुड़ना चाहिए, ताकि आने वाले समय में हमारा समाज अपनी मजबूत राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित कर सके और विकास की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्थान प्राप्त कर सके। एकजुटता ही शक्ति है। जब 51 जातियां एक मंच पर संगठित होंगी, तब परिवर्तन अवश्य संभव होगा। यह केवल संगठन से जुड़ने का आह्वान नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने का संकल्प है। आइए, हम सब मिलकर अपने अधिकार, सम्मान और विकास के लिए एकजुट हों। तभी इस वर्ग का वास्तविक कल्याण सुनिश्चित हो सकेगा।
—पटेल मधुसूदन धनगर
राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं कार्यालय प्रभारी
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जनजाति महासंघ
मो. 9826536032
