नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत हमारे समाज पर लगभग सही सिद्ध होती दिखाई पड़ती है, क्योंकि वर्तमान समय में हमारे समाज पर आने वाली अनेक विपत्तियां, समाज पर होने वाले अत्याचार या समाज की किसी भी गतिविधि पर समाज के प्रभावशाली लोगों की आवाज उठाने की तो छोड़ो बल्कि कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आती है। समाज में होने वाली किसी घटना या किसी व्यक्ति पर कोई अत्याचार या परेशानी आने पर या प्राकृतिक आपदा आने पर केवल कुछ ही चुनिंदा नाम हैं जो बार-बार प्रखर रूप से त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं और समाज को न्याय दिलाने या राहत दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर काम भी करते हैं और भरपूर साथ देते हैं। वहीं समाज के राजनेता चाहे वो सत्ताधारी दल के हों या किसी अन्य राजनैतिक दल के हों, समाज के बड़े-बड़े प्रभावशाली नाम, समाज के अनेक सामाजिक संगठन, समाज के प्रशासनिक अधिकारी आदि सभी मौन हो जाते हैं। ऐसा लगता है मानो उन्हें कुछ पता ही न हो कि हमारे समाज में क्या घटना हुई, जैसे किसी व्यक्ति पर कोई अत्याचार हुआ ही न हो। वहीं समाज के कुछ चुनिंदा नाम, बार-बार वही लोग समाज की आवाज को प्रमुखता से उठाते हैं और हरसंभव न्याय दिलाने की कोशिश करते हैं, साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं। तो क्या केवल चुनाव आने पर या केवल अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षा के लिए ये सभी समाज को ठगने का काम करते हैं? जब वास्तव में समाज को आप लोगों की आवश्यकता होती है, तब आप क्यों साथ खड़े नहीं होते हैं? क्या ऐसे ही हमारे समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है? क्या ऐसे ही हमारे समाज का विकास होगा? क्यों हम किसी मुद्दे पर एकजुट नहीं हो पाते हैं? क्यों हमारी आवाज एक साथ शासन और प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती है? आज बड़े-बड़े नाम केवल अपने समाज की आवाज लिखने से भी डरते हैं, कही इससे उनका राजनैतिक अहित न हो जाए। वहीं दूसरी ओर कुछ अपने ही समाज के बंधुवर बिना किसी राजनैतिक लाभ के समाज की सेवा में तत्पर रहते हैं। हम सबको एक होना होगा, अपनी आवाज एक साथ सही समय पर उठानी होगी। बेशक हमारे रास्ते अलग-अलग हों परंतु हमें अपने सामाजिक मुद्दों पर एक होना ही होगा, तभी हमारे समाज को नई दिशा मिलेगी जिससे हमारे समाज की दशा भी सुधरेगी।
-विवेक पाल
ग्राम-इस्माईलपुरदमी (नकीपुर), बिजनौर
मो. 9410262114
समाज पर विपत्ति : बड़े मौन और छोटे मुखर!
समाज पर विपत्ति : बड़े मौन और छोटे मुखर!
नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत हमारे समाज पर लगभग सही सिद्ध होती दिखाई पड़ती है, क्योंकि वर्तमान समय में हमारे समाज पर आने वाली अनेक विपत्तियां, समाज पर होने वाले अत्याचार या समाज की किसी भी गतिविधि पर समाज के प्रभावशाली लोगों की आवाज उठाने की तो छोड़ो बल्कि कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आती है। समाज में होने वाली किसी घटना या किसी व्यक्ति पर कोई अत्याचार या परेशानी आने पर या प्राकृतिक आपदा आने पर केवल कुछ ही चुनिंदा नाम हैं जो बार-बार प्रखर रूप से त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं और समाज को न्याय दिलाने या राहत दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर काम भी करते हैं और भरपूर साथ देते हैं। वहीं समाज के राजनेता चाहे वो सत्ताधारी दल के हों या किसी अन्य राजनैतिक दल के हों, समाज के बड़े-बड़े प्रभावशाली नाम, समाज के अनेक सामाजिक संगठन, समाज के प्रशासनिक अधिकारी आदि सभी मौन हो जाते हैं। ऐसा लगता है मानो उन्हें कुछ पता ही न हो कि हमारे समाज में क्या घटना हुई, जैसे किसी व्यक्ति पर कोई अत्याचार हुआ ही न हो। वहीं समाज के कुछ चुनिंदा नाम, बार-बार वही लोग समाज की आवाज को प्रमुखता से उठाते हैं और हरसंभव न्याय दिलाने की कोशिश करते हैं, साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं। तो क्या केवल चुनाव आने पर या केवल अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षा के लिए ये सभी समाज को ठगने का काम करते हैं? जब वास्तव में समाज को आप लोगों की आवश्यकता होती है, तब आप क्यों साथ खड़े नहीं होते हैं? क्या ऐसे ही हमारे समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है? क्या ऐसे ही हमारे समाज का विकास होगा? क्यों हम किसी मुद्दे पर एकजुट नहीं हो पाते हैं? क्यों हमारी आवाज एक साथ शासन और प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती है? आज बड़े-बड़े नाम केवल अपने समाज की आवाज लिखने से भी डरते हैं, कही इससे उनका राजनैतिक अहित न हो जाए। वहीं दूसरी ओर कुछ अपने ही समाज के बंधुवर बिना किसी राजनैतिक लाभ के समाज की सेवा में तत्पर रहते हैं। हम सबको एक होना होगा, अपनी आवाज एक साथ सही समय पर उठानी होगी। बेशक हमारे रास्ते अलग-अलग हों परंतु हमें अपने सामाजिक मुद्दों पर एक होना ही होगा, तभी हमारे समाज को नई दिशा मिलेगी जिससे हमारे समाज की दशा भी सुधरेगी।
-विवेक पाल
ग्राम-इस्माईलपुरदमी (नकीपुर), बिजनौर
मो. 9410262114
