Wednesday, March 4, 2026

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समाज बड़ा या पार्टी- एक विचारणीय प्रश्न!

अखिल भारतीय स्तर पर गडरिया पाल समाज राष्ट्र के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में निवास कर रहा है। वर्तमान समय राजनीतिक परिवेश का होने के कारण समाज के लोग विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय समाज पक्ष, राष्ट्र उदय पार्टी के साथ-साथ सामाजिक संगठन अखिल भारतीय पाल महासभा, अखिल भारतीय गडरिया महासभा एवं प्रत्येक राज्य में क्षेत्रीय सामाजिक संगठन बने हुए हैं। अभी कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में गडरिया पाल समाज के लोगों के साथ काफी भेदभावपूर्ण व्यवहार हो रहा है जिसमें मारपीट, छुआछूत, प्रताड़ना एवं हत्या-बलात्कार तक की घटनाएं घटित हो रही हैं। इसके मामले न्यायालय में अथवा पुलिस-प्रशासन में लंबित हंै। इसके साथ ही अब भारत की महान वीरांगना, न्याय की प्रतिमूर्ति, लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़, प्रतिमा का विखंडन करना, प्रतिमाओं को तोड़ देना असामाजिक तत्वों के साथ-साथ अब तो शासन-प्रशासन द्वारा भी किया जा रहा है जो बहुत ही दुखद है। हम इसका विरोध करते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में मणिकर्णिका घाट में मंदिरों के साथ-साथ देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमाओं को भी बुल्डोजर से तोड़े जाने की जानकारी प्राप्त हुई है जोकि अति दुखद और बहुत ही चिंतन योग्य विषय है। देवी अहिल्याबाई होल्कर त्रिजन्म शताब्दी वर्ष अंतर्गत पूरे राष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा उनके सुशासन व सेवा कार्यों के लिए आयोजन कर उन्हें सम्मानित करने का कार्य किया गया था। भोपाल के विशाल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा ₹300 रुपये का सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन पर बड़े-बड़े कसीदे पढ़े थे किंतु उनके ही शासन में और नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से प्रतिमाओं को बुल्डोजर से तोड़ा गया और गडरिया पाल समाज के युवाओं को गिरफ्तार किया गया। संपूर्ण राष्ट्र के सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक-आध्यात्मिक संगठनों से जुड़े सामाजिक भाई-बहनों से अपील है कि इसका विरोध राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर करें। यह वक्त पार्टी का नहीं अपने समाज का, अपने स्वाभिमान का वक्त है। आज निर्णय की घड़ी है कि समाज बड़ा है या पार्टी? हमारा अपना मानना है कि समाज बड़ा है, स्वाभिमान बड़ा है, अपनी संस्कृति बड़ी है। सुझाव हमारा, फैसला आपका।
-नारायण प्रसाद पाली
(राष्ट्रीय समाचार पत्रों के लेखक,
सामाजिक विषयों के जानकार,
अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक महासंघ )
मो. 9575761235

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समाज बड़ा या पार्टी- एक विचारणीय प्रश्न!

अखिल भारतीय स्तर पर गडरिया पाल समाज राष्ट्र के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में निवास कर रहा है। वर्तमान समय राजनीतिक परिवेश का होने के कारण समाज के लोग विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय समाज पक्ष, राष्ट्र उदय पार्टी के साथ-साथ सामाजिक संगठन अखिल भारतीय पाल महासभा, अखिल भारतीय गडरिया महासभा एवं प्रत्येक राज्य में क्षेत्रीय सामाजिक संगठन बने हुए हैं। अभी कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में गडरिया पाल समाज के लोगों के साथ काफी भेदभावपूर्ण व्यवहार हो रहा है जिसमें मारपीट, छुआछूत, प्रताड़ना एवं हत्या-बलात्कार तक की घटनाएं घटित हो रही हैं। इसके मामले न्यायालय में अथवा पुलिस-प्रशासन में लंबित हंै। इसके साथ ही अब भारत की महान वीरांगना, न्याय की प्रतिमूर्ति, लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़, प्रतिमा का विखंडन करना, प्रतिमाओं को तोड़ देना असामाजिक तत्वों के साथ-साथ अब तो शासन-प्रशासन द्वारा भी किया जा रहा है जो बहुत ही दुखद है। हम इसका विरोध करते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में मणिकर्णिका घाट में मंदिरों के साथ-साथ देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमाओं को भी बुल्डोजर से तोड़े जाने की जानकारी प्राप्त हुई है जोकि अति दुखद और बहुत ही चिंतन योग्य विषय है। देवी अहिल्याबाई होल्कर त्रिजन्म शताब्दी वर्ष अंतर्गत पूरे राष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा उनके सुशासन व सेवा कार्यों के लिए आयोजन कर उन्हें सम्मानित करने का कार्य किया गया था। भोपाल के विशाल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा ₹300 रुपये का सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन पर बड़े-बड़े कसीदे पढ़े थे किंतु उनके ही शासन में और नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से प्रतिमाओं को बुल्डोजर से तोड़ा गया और गडरिया पाल समाज के युवाओं को गिरफ्तार किया गया। संपूर्ण राष्ट्र के सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक-आध्यात्मिक संगठनों से जुड़े सामाजिक भाई-बहनों से अपील है कि इसका विरोध राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर करें। यह वक्त पार्टी का नहीं अपने समाज का, अपने स्वाभिमान का वक्त है। आज निर्णय की घड़ी है कि समाज बड़ा है या पार्टी? हमारा अपना मानना है कि समाज बड़ा है, स्वाभिमान बड़ा है, अपनी संस्कृति बड़ी है। सुझाव हमारा, फैसला आपका।
-नारायण प्रसाद पाली
(राष्ट्रीय समाचार पत्रों के लेखक,
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अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक महासंघ )
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