Monday, March 2, 2026

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होली पर संकल्प : कुप्रथा मुक्त समाज की ओर एक कदम!

होली का पावन पर्व प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह त्यौहार हमें बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को अपनाने की प्रेरणा देता है। हमारे समाज में विशेषकर मालवा क्षेत्र में एक ऐसी कुप्रथा वर्षों से चली आ रही है कि किसी परिवार में मृत्यु होने पर उस परिवार द्वारा रिश्तेदारों को बर्तन, पतासे एवं अन्य सामग्री दी जाती है। यह परंपरा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालती है और समाज के विकास में बाधक बनती है। यह जानकर संतोष होता है कि कई समाजों ने इस कुप्रथा को समाप्त कर दिया है। हमारी धनगर समाज के भी अनेक ग्रामों में इसे बंद किया जा चुका है। अब समय आ गया है कि हम मध्य प्रदेश के सभी जिले के प्रत्येक ग्राम में इस होली से इस कुप्रथा को पूर्णत: बंद करने का संकल्प लेते हैं, यदि कोई इसके बाद भी यह प्रथा जारी रखता है तो कृपया उनको समझाएं, उसके बाद भी बात नहीं मानते हैं तो कृपया सूचित करें।
हम सबका सामूहिक निर्णय :

  1. मृत्यु के अवसर पर किसी भी प्रकार के बर्तन, पतासे या अन्य वस्तु देने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
  2. शोक की घड़ी में परिवार को सहयोग, सांत्वना और मानवीय समर्थन दिया जाए, न कि आर्थिक बोझ बढ़ाया जाए।
  3. जो राशि इस प्रथा में खर्च होती थी, उसे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य या समाज के विकास कार्यों में लगाया जाए।
    होली बुराइयों के दहन का पर्व है। आइए, इस होली पर हम इस कुप्रथा का भी दहन करें और समाज सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाएँ। जो भी इस निर्णय से सहमत हैं, कृपया अपनी सहमति अवश्य दें। यह समाजहित का विषय है। हम सबकी एकजुटता से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। संकल्प लें-कुप्रथा मुक्त, प्रगतिशील और सशक्त समाज का निर्माण करें।
    -मधुसूदन धनगर
    प्रदेश प्रधान संगठन मंत्री, कार्यालय प्रभारी
    विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतु जनजाति महासंघ मप्रं
    मो. 9826536032

International

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होली पर संकल्प : कुप्रथा मुक्त समाज की ओर एक कदम!

होली का पावन पर्व प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह त्यौहार हमें बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को अपनाने की प्रेरणा देता है। हमारे समाज में विशेषकर मालवा क्षेत्र में एक ऐसी कुप्रथा वर्षों से चली आ रही है कि किसी परिवार में मृत्यु होने पर उस परिवार द्वारा रिश्तेदारों को बर्तन, पतासे एवं अन्य सामग्री दी जाती है। यह परंपरा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालती है और समाज के विकास में बाधक बनती है। यह जानकर संतोष होता है कि कई समाजों ने इस कुप्रथा को समाप्त कर दिया है। हमारी धनगर समाज के भी अनेक ग्रामों में इसे बंद किया जा चुका है। अब समय आ गया है कि हम मध्य प्रदेश के सभी जिले के प्रत्येक ग्राम में इस होली से इस कुप्रथा को पूर्णत: बंद करने का संकल्प लेते हैं, यदि कोई इसके बाद भी यह प्रथा जारी रखता है तो कृपया उनको समझाएं, उसके बाद भी बात नहीं मानते हैं तो कृपया सूचित करें।
हम सबका सामूहिक निर्णय :

  1. मृत्यु के अवसर पर किसी भी प्रकार के बर्तन, पतासे या अन्य वस्तु देने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
  2. शोक की घड़ी में परिवार को सहयोग, सांत्वना और मानवीय समर्थन दिया जाए, न कि आर्थिक बोझ बढ़ाया जाए।
  3. जो राशि इस प्रथा में खर्च होती थी, उसे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य या समाज के विकास कार्यों में लगाया जाए।
    होली बुराइयों के दहन का पर्व है। आइए, इस होली पर हम इस कुप्रथा का भी दहन करें और समाज सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाएँ। जो भी इस निर्णय से सहमत हैं, कृपया अपनी सहमति अवश्य दें। यह समाजहित का विषय है। हम सबकी एकजुटता से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। संकल्प लें-कुप्रथा मुक्त, प्रगतिशील और सशक्त समाज का निर्माण करें।
    -मधुसूदन धनगर
    प्रदेश प्रधान संगठन मंत्री, कार्यालय प्रभारी
    विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतु जनजाति महासंघ मप्रं
    मो. 9826536032

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