कानपुर। सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. अंशुमान सिंह के होनहार सुपुत्र मास्टर यशवर्धन सिंह ने अर्ली चाइल्डहुड केयर एजुकेशन एंड रिसर्च इंटरनेशनल फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में ए.आई. टेक्नोलॉजी का शिक्षा में उपयोग विषय पर व्याख्यान देकर विश्वभर के शैक्षिक प्रतिनिधियों के बीच भारत का मान बढ़ाया। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में दुनिया के सबसे नन्हे इतिहासकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बालप्रतिभा हैं मास्टर यशवर्धन सिंह, जिन्होंने हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में इतिहास एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में यंगेस्ट हिस्टोरियन का मानदंड स्थापित किया। उनके पिता डॉ. अंशुमान सिंह एवं माता कंचन (प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका) के प्रेरणादायक मार्गदर्शन एवं सहयोग से यशवर्धन न केवल सिविल सेवा, एसएससी, एनडीए अभ्यर्थियों को इतिहास, भूगोल व राजव्यवस्था पढ़ाते हैं, अपितु उच्च आईक्यू स्तर (129) के साथ यूपी बोर्ड द्वारा कक्षा 7 से सीधे 9वीं में प्रवेश लेकर उन्होंने प्रतिभा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। हरिकमल दर्पण परिवार की ओर से उन्हें बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। -सम्पादक
मास्टर यशवर्धन सिंह ने फिर बढ़ाया देश व समाज का मान
कानपुर। सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. अंशुमान सिंह के होनहार सुपुत्र मास्टर यशवर्धन सिंह ने अर्ली चाइल्डहुड केयर एजुकेशन एंड रिसर्च इंटरनेशनल फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में ए.आई. टेक्नोलॉजी का शिक्षा में उपयोग विषय पर व्याख्यान देकर विश्वभर के शैक्षिक प्रतिनिधियों के बीच भारत का मान बढ़ाया। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में दुनिया के सबसे नन्हे इतिहासकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बालप्रतिभा हैं मास्टर यशवर्धन सिंह, जिन्होंने हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में इतिहास एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में यंगेस्ट हिस्टोरियन का मानदंड स्थापित किया। उनके पिता डॉ. अंशुमान सिंह एवं माता कंचन (प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका) के प्रेरणादायक मार्गदर्शन एवं सहयोग से यशवर्धन न केवल सिविल सेवा, एसएससी, एनडीए अभ्यर्थियों को इतिहास, भूगोल व राजव्यवस्था पढ़ाते हैं, अपितु उच्च आईक्यू स्तर (129) के साथ यूपी बोर्ड द्वारा कक्षा 7 से सीधे 9वीं में प्रवेश लेकर उन्होंने प्रतिभा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। हरिकमल दर्पण परिवार की ओर से उन्हें बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। -सम्पादक
