लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ/एआरओ) के पदों पर भर्ती 2023 के लिए हुई प्रारंभिक परीक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मुद्दे उठाने वाली याचिका को पहले से विचाराधीन अन्य याचिका के साथ संबद्ध करके सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। पहले, विवेक यादव व अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने उप्र लोकसेवा आयोग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अब इस नई याचिका पर भी कोर्ट ने पक्षकारों को अपने जवाब और इसके प्रति उत्तर दाखिल करने का समय दिया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने 13 फरवरी को यह आदेश विजय कुमार सोनी व 23 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में ओबीसी अभ्यर्थियों का कटऑफ, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक होने के बावजूद, ऐसे ओबीसी अभ्यर्थियों को प्री परीक्षा में फेल कर दिया गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह आयोग ने प्री परीक्षा में ओबीसी आरक्षण में कथित अनियमितता करके ओबीसी सीटों को सामान्य वर्ग में समायोजित किया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर प्री परीक्षा परिणाम की मेरिट सूची का पुन: निर्धारण करके मुख्य परीक्षा कराए जाने का आग्रह किया है। -ब्यूरो
ओबीसी कटऑफ विवाद में लोक सेवा आयोग से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ/एआरओ) के पदों पर भर्ती 2023 के लिए हुई प्रारंभिक परीक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मुद्दे उठाने वाली याचिका को पहले से विचाराधीन अन्य याचिका के साथ संबद्ध करके सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। पहले, विवेक यादव व अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने उप्र लोकसेवा आयोग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अब इस नई याचिका पर भी कोर्ट ने पक्षकारों को अपने जवाब और इसके प्रति उत्तर दाखिल करने का समय दिया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने 13 फरवरी को यह आदेश विजय कुमार सोनी व 23 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में ओबीसी अभ्यर्थियों का कटऑफ, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक होने के बावजूद, ऐसे ओबीसी अभ्यर्थियों को प्री परीक्षा में फेल कर दिया गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह आयोग ने प्री परीक्षा में ओबीसी आरक्षण में कथित अनियमितता करके ओबीसी सीटों को सामान्य वर्ग में समायोजित किया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर प्री परीक्षा परिणाम की मेरिट सूची का पुन: निर्धारण करके मुख्य परीक्षा कराए जाने का आग्रह किया है। -ब्यूरो
