वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ के मामले में यूँ तो पूरे देश के गडरिया समाज में नाराजगी है लेकिन इस मामले ने समाज की सबसे बड़ी कमजोरी (एकजुटता का अभाव) को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं लेकिन कहीं भी समाज की ऐसी एकजुटता नहीं दिखाई दी जिससे शासन-प्रशासन पर कुछ असर पड़े। उधर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े समाज के नेताओं का इस मामले पर रुख काफी असंतोषजनक रहा जिससे यह आंदोलन जोर नहीं पकड़ सका। भाजपा से जुड़े समाज के नेता इस मामले में या तो चुप्पी साधे रहे या सरकार का बचाव करते नजर आए। बहरहाल, इस मामले ने समाज की कमजोरी को पूरी तरह उजागर कर दिया जोकि अत्यंत पीड़ादायक है।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!
-निरंजन सिंह पाल
हमारी कमजोरी फिर उजागर!
हमारी कमजोरी फिर उजागर!
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ के मामले में यूँ तो पूरे देश के गडरिया समाज में नाराजगी है लेकिन इस मामले ने समाज की सबसे बड़ी कमजोरी (एकजुटता का अभाव) को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं लेकिन कहीं भी समाज की ऐसी एकजुटता नहीं दिखाई दी जिससे शासन-प्रशासन पर कुछ असर पड़े। उधर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े समाज के नेताओं का इस मामले पर रुख काफी असंतोषजनक रहा जिससे यह आंदोलन जोर नहीं पकड़ सका। भाजपा से जुड़े समाज के नेता इस मामले में या तो चुप्पी साधे रहे या सरकार का बचाव करते नजर आए। बहरहाल, इस मामले ने समाज की कमजोरी को पूरी तरह उजागर कर दिया जोकि अत्यंत पीड़ादायक है।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!
-निरंजन सिंह पाल
