मैंने नहीं खेला
कभी कोई खेल
बचपन से आज तक
सिर्फ किताबों के सहारे
गुजार दिया
बचपन और जवानी।
मैं कभी नहीं रोया
किसी के मरने पर
मैंने कभी नहीं मनाया जश्न
किसी की बरबादी पर
मैं हमेशा सबसे अलग रहा
बस यूं ही जीता रहा
लिखता रहा
एक अनजान रास्ते पर चलता रहा ।
लोग मुझे स्वार्थी
असंवेदनशील
पत्थर हृदय
मनोरोगी
न जाने क्या-क्या कहते रहे
पर मैंने कभी किसी से कुछ न कहा
बस अपना काम किया…।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर,
फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
मैं हैरान हूं…
मैं हैरान हूं…
मैंने नहीं खेला
कभी कोई खेल
बचपन से आज तक
सिर्फ किताबों के सहारे
गुजार दिया
बचपन और जवानी।
मैं कभी नहीं रोया
किसी के मरने पर
मैंने कभी नहीं मनाया जश्न
किसी की बरबादी पर
मैं हमेशा सबसे अलग रहा
बस यूं ही जीता रहा
लिखता रहा
एक अनजान रास्ते पर चलता रहा ।
लोग मुझे स्वार्थी
असंवेदनशील
पत्थर हृदय
मनोरोगी
न जाने क्या-क्या कहते रहे
पर मैंने कभी किसी से कुछ न कहा
बस अपना काम किया…।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर,
फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
