Monday, March 2, 2026

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घड़ियालों में मगरमच्छ!

कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
घड़ियालों में मगरमच्छ के,
जैसे हैं हर जात में!
शहर, गाँव, हर गली, मोहल्ला
बंदर बनकर फिरें गोरिल्ला
फुदकती गिलहरी सी जनता,
चिचियाएँ हर शाख में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
समाज-प्रेमी ऐसे अनुरागी
शहद चाटने के जो आदी
मधुमक्खियों से करें उगाही,
मिल-जुलकर जमात में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
मेरा अनुभव यही है कहता
पाला साँप ही आ डसता
आस्तीन में बैठे सपोले,
दाँत उगाएँ आँत में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
मैं उनका मुख बांधकर
पकड़ूँ गर्दन, धड़ लांघकर
हार न मानूंगा हर्गिज,
साँसें अर्पित प्रतिघात में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985

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घड़ियालों में मगरमच्छ!

कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
घड़ियालों में मगरमच्छ के,
जैसे हैं हर जात में!
शहर, गाँव, हर गली, मोहल्ला
बंदर बनकर फिरें गोरिल्ला
फुदकती गिलहरी सी जनता,
चिचियाएँ हर शाख में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
समाज-प्रेमी ऐसे अनुरागी
शहद चाटने के जो आदी
मधुमक्खियों से करें उगाही,
मिल-जुलकर जमात में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
मेरा अनुभव यही है कहता
पाला साँप ही आ डसता
आस्तीन में बैठे सपोले,
दाँत उगाएँ आँत में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
मैं उनका मुख बांधकर
पकड़ूँ गर्दन, धड़ लांघकर
हार न मानूंगा हर्गिज,
साँसें अर्पित प्रतिघात में!
कदम-कदम पर चक्रव्यूह रच,
दुष्ट खड़े हैं घात में!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985

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