रंगों का त्योहार होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
पौराणिक कथा और महत्व :
होली की मुख्य कथा भक्त प्रह्लाद और राक्षस राजा हिरण्यकशिपु से जुड़ी है, जहां होलिका दहन बुराई के नाश का संदेश देता है। दूसरी कथाओं में राधा-कृष्ण का प्रेम और कामदेव की पुनर्जीवन की कहानी भी शामिल है। यह पर्व प्रेम, भाईचारा और सौहार्द सिखाता है।
इंदौर की होली परंपराएं :
इंदौर में होलकर राजवंश की 294 वर्ष पुरानी परंपरा राजवाड़ा पर होलिका दहन के रूप में जीवित है, जहां युवराज यशवंत राव होलकर जैसे सदस्य भाग लेते हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय जंगल में 5 दिनों तक विशेष पूजा करते हैं, जहां रंग लगाना प्रतिबंधित है। मध्य प्रदेश में गुंजिया, ठंडाई जैसे पकवानों के साथ उत्सव होता है।
विशेष रेसिपी : गुजिया और ठंडाई
होली की गुजिया के लिए मैदा का आटा, खोया, थंडाई मसाला (बादाम, काजू, पिस्ता, सौंफ), नारियल और चीनी मिलाकर भरें। ठंडाई में दूध, थंडाई पाउडर (गुलाब पंखुड़ियां, केसर, मेलन सीड्स) मिलाकर परोसें। ये व्यंजन त्योहार को स्वादिष्ट बनाते हैं।
होली कविता अंश :
‘रंग-बिरंगी आई होली। मुन्नी आओ, चुन्नी आओ, रंग भरी पिचकारी लाओ…’ यह कविता उत्साह जगाती है।
-पटेल मधुसूदन धनगर
प्रदेश प्रधान संगठन मंत्री, कार्यालय प्रभारी
विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतु जनजाति महासंघ मप्रं
मो. 9826536032
होली 2026 : रंगों का त्योहार
होली 2026 : रंगों का त्योहार
रंगों का त्योहार होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
पौराणिक कथा और महत्व :
होली की मुख्य कथा भक्त प्रह्लाद और राक्षस राजा हिरण्यकशिपु से जुड़ी है, जहां होलिका दहन बुराई के नाश का संदेश देता है। दूसरी कथाओं में राधा-कृष्ण का प्रेम और कामदेव की पुनर्जीवन की कहानी भी शामिल है। यह पर्व प्रेम, भाईचारा और सौहार्द सिखाता है।
इंदौर की होली परंपराएं :
इंदौर में होलकर राजवंश की 294 वर्ष पुरानी परंपरा राजवाड़ा पर होलिका दहन के रूप में जीवित है, जहां युवराज यशवंत राव होलकर जैसे सदस्य भाग लेते हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय जंगल में 5 दिनों तक विशेष पूजा करते हैं, जहां रंग लगाना प्रतिबंधित है। मध्य प्रदेश में गुंजिया, ठंडाई जैसे पकवानों के साथ उत्सव होता है।
विशेष रेसिपी : गुजिया और ठंडाई
होली की गुजिया के लिए मैदा का आटा, खोया, थंडाई मसाला (बादाम, काजू, पिस्ता, सौंफ), नारियल और चीनी मिलाकर भरें। ठंडाई में दूध, थंडाई पाउडर (गुलाब पंखुड़ियां, केसर, मेलन सीड्स) मिलाकर परोसें। ये व्यंजन त्योहार को स्वादिष्ट बनाते हैं।
होली कविता अंश :
‘रंग-बिरंगी आई होली। मुन्नी आओ, चुन्नी आओ, रंग भरी पिचकारी लाओ…’ यह कविता उत्साह जगाती है।
-पटेल मधुसूदन धनगर
प्रदेश प्रधान संगठन मंत्री, कार्यालय प्रभारी
विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतु जनजाति महासंघ मप्रं
मो. 9826536032
