दुनियादारी की खातिर, निकाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
फूल चम्पा चमेली सा, रोपा उसे
क्या करना, न करना है, टोका उसे
सौंप दी हाथ में, जैसे टाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
आन के वास्ते, लब सिए की तरह
बेटी, तुलसी में रोशन, दीए की तरह
वो नहीं तो वहाँ का, उजाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
ले-के चलता बना, फूल का दावेदार
रोए माँ-बाप, भाई की ममता दुलार
वहाँ दावत, यहाँ से निवाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
चार टुकड़ों में, दिल को पिरोए सभी
बाँटना जब पड़ा, नैन रोए सभी
करके बेटी विदा, मन संभाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
खुश्बू कलियों के, जद से बिखरने लगी
खु़ुद सँवरने लगी, खु़ुद निखरने लगी,
पी के चौखट से पीहर का, पाला गया!
घर से माणिक नगीना, उछाला गया!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
माणिक नगीना उछाला गया!
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