09
Sep
कारखानों से निकला धुआँ!
कारखानों से निकला धुआँ,शहरों का गंदा पानी!लील रहे ये हवा भूमि जल,गटक रहे जिंदगानी!!जंगल को संरक्षण दीजे,साँसों को ताजगीधन-सम्पदा सफाया
08
Sep
पता ही नहीं चला…
कैसे यह सफर पूरा हो गया,पता ही नहीं चला।क्या पाया, क्या खोया,पता ही नहीं चला।बचपन बीत गया,जवानी भी ढल गई,कब
03
Sep
मानव जीवन मूल्यवान!
केवल भौतिक सुख-सुविधा पर,खर्च न कर नादान!है मानव जीवन मूल्यवान!!आत्म-अवलोकन, चेतना पर भीरख निज-ध्यान!है मानव जीवन मूल्यवान!!तेरी असंख्य उलझनें हैं,दुख-सुख
31
Aug
यह मेरा संशय!
देखा मैंने भूतल परविस्मय ही विस्मयकौन चलाता पवन वेगयह मेरा संशय।।सूरज की किरणों को पाकरदूर भागता अंधकारप्रात: होते ही सूरज
30
Aug
देखे कहाँ विराट विश्व!
(मधुगीति 260822 B) 11:06देखे कहाँ विराट विश्व,सीमित दृग भव;खग मृग के भाव समझे कहाँ,आत्म प्रवाहित!ना जान पाए निज स्वरूप,ना ही