18
Oct
जितना उठोगे देह से!
(मधुगीति 261007 C) 16:07जितना उठोगे देह से,जितना तरोगे मोह से;उतना ही हल्का होओगे,जा व्योम ज्यादा लखोगे!एक दिन है जग को
17
Oct
क्या लिखूँ?
कलम चलाऊँ तो क्या लिखूँ?मुल्क की बर्बादीया खाकी द्वारा नंगी पीठ पर लिखी वो लिपिजिसे पढ़ने के लिए किसी गाँधी
12
Oct
सामंतवादी…
सामंतवादी व्यवस्था का,जाल फैलाकर छोड़ेंगे।लगता है लोगों कोगुलाम बनाकर छोड़ेंगे।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सेइनकी दुश्मनी है।नशे की लत से युवाओं कोबेकार
10
Oct
मौन साधक वृक्ष है!
मौन साधक वृक्ष है,शिवत्व में सधा-तपा!विष स्वयं स्वीकार्य करता,सींचता अमृत सदा!!वृक्ष वन उपवन सजाता,जीव-जंतु श्वास पातेकीट पक्षी डालियों परअपना शहर
07
Oct
क्यों बुद्धि इतनी लगाते!
(मधुगीति 260923 B) 23:53क्यों बुद्धि इतनी लगाते,हर बात पर तुम बोलते;क्यों भाव-जड़ता में फँसे,ना सृष्टि अपनी समझते!तुम खोज करना चाहते,अंतस