जन-जन उलझन से भरा हुआ है, हावी युग-सम्राज!
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
अपमानित हर-एक का जीवन, किस पर करिए नाज?
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
घर-बाहर बस रेल की यात्रा, कड़वे बोल सहज
नर-नारी बच्चे-बुजुर्ग, अभद्र दिखें बरबस
आक्रोशित बेचैन स्वयं भी, हर मुख का यही राज!
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
निज-घावों को रखें छुपाकर, पीड़ा चोट छुपायँ
जैसा स्वयं के लिए चाहते, वह व्यवहार निभायँ
आत्मग्लानि से कुंठित जन ही, करे घात-प्रतिघात!
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
तिरस्कार में पला-बढ़ा नर, मृदुल बने कैसे?
अपमानित होकर भी ऐसे जन को, सहें ऐसे
माफ करो भी, मांगो माफी, मन रख कर बिंदास!
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
विषम-अवस्था धैर्य रखकर, झेली जा सकती
मन:स्थिति में भी दृढ़ता, रखी जा सकती
जीवन-ऊर्जा क्षरण रोकिए, बाँटिए महक सुवास!
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
पहनिए सुखमय जीवन ताज!!
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted