न जाने क्यों ये अपने ही भरोसा तोड़ जाते है।
बड़ी मुश्किल की राहों पर अकेले छोड़ जाते हैं।
हमारे हिस्से में भी कुछ उजाला प्यार का दे दो।
हमें ही क्यों अकेले तीरगी से जोड़ जाते हैं।
न जाने क्या अजब जादू है परदेसी हवा में भी।
परिंदे आशियाने को बनाकर छोड़ जाते हैं।
मुझे मालूम अच्छे-अच्छे की ईमानदारी का।
सही कीमत अदा होने से वो मुँह खोल जाते हैं।
हवेली कर्ज में देकर शिकायत तो नहीं उनसे।
कसक इसकी रही, ये दाग पुरखे छोड़ जाते हैं।
-ओमपाल सिंह बघेल, हाथरस
मो. 8207274038
न जाने क्यों…
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