24
Jun
दान का पइसा खा गया!
दान का पइसा खा गया, बगुलों का महाझुंड!निश-दिन भरती पेटियाँ, जनता उद्गम कुंड!!भगवानों की झाँकियाँ, मंदिर, मठ, बाजार!देखो और चढ़ाओ
22
Jun
आए, गए, ध्यान कुछ कह गए!
(मधुगीति 260615) 2:45आए, गए, ध्यान कुछ कह गए,लख गए, चख गए, वे बदल कुछ गए;ले के कुछ वे गए, और
20
Jun
मातृशक्ति…
पत्थरों की छाती पर गरधमक से पांव रख दूंतो जमीं दरक जाती हैकभी बायें कभी दायेंथोड़ी सी सरक जाती है।वह
19
Jun
मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ!
(मधुगीति 260617) 01:58मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ,अनुभूत हूँ, अणु भूत हूँ;सापेक्ष सुर, संभूत हूँ,निरपेक्ष सत्ता, स्रोत हूँ!ना लिप्त हूँ, ना