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Apr
विश्वास के रंग!
जीवन क्या है..?जीवन का दूसरा नाम है विश्वासजब टूटता है विश्वासटूट जाता है स्वयं इन्सानऔर तोड़ता है विश्वासमन का शक,
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Apr
कलयुगी रामराज्य!
रामराज्य की ढपली खूब बजाईढपली की आड़ में रावणता फैलाईखाकी हुई बेशर्मसिक्कों में सितारे बेच रहीलुच्चे और लफंगों संग कर
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Apr
कहते थे अम्बेडकर!
कहते थे अम्बेडकर, दलित हितों की बात!स्वतंत्रता से पहले हो, समानता सौगात!जन-गण-मन में छुआछूत थीमानवता में बड़ी चूक थीतिलक, तराजू,
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Apr
कोई उदास अपने वास!
(मधुगीति 260409 B) 00:39कोई उदास अपने वास, त्रास में रहे;विंदास कोई जगत रहे, सृष्टि निहारे!बंधन में कोई बँधे मन के,