19
Jun
मुझे जीना है!
मेरा मन डूब रहा हैअनजाने अंधकार मेंमेरी सारी कोशिशेंमेरे सारे प्रयासबेकार हो रहे हैं।टूट रहा है बार-बारमनोबल!सांसारिक आघातअपनों का दगाजब
17
Jun
आंगन में दीवार उठाओगे!
बर्तन सम टकराकर,आंगन में दीवार उठाओगे!बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,जग में धूम मचाओगे!!अपना हित, नुकसान गैर का,ऐसा जीवन मत जीनानिर्झर
14
Jun
जीवन-मेला…
जीवन एक मेला है।सुख-दुख का झमेला है।कभी संग साथी तो,कभी मनुष्य अकेला है।जीवन है अनजाना सफर।हम सब हैं यहां मुसाफिर।कुछ
13
Jun
मामूली इंसान हो तुम!
खुद को खुदा मत समझो,एक मामूली इंसान हो तुम।क्यों इतराते हो इतनाक्या खुदा का पैगाम हो तुम?मौसम ए गर्मी में,तो
09
Jun
पेंशन-ऐ-हसीना…!
जवानी में हमारे भी बड़े रंग थे,'तनख़्वाह' नाम की एक हसीना के संग थे।महीने की पहली तारीख को वो मुस्कुराती