03
Aug
पाये समझ थे कितने उन्हें!
(मधुगीति 260802 B) 4:53पाये समझ थे कितने उन्हें,समझे वे जिन्हें;जीवन-प्रयोग झाँकियों में,विचरत भव में!हर पल प्रवासी श्वांस रही,आश बहु रहीं;विश्वास
03
Aug
आदि-निवासी चरित्रवान हम गड़रिये!
ज्ञान, धन, प्रभुत्व में है आगे हर समाज!उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!अजंता, अमरनाथ की खोज हमने कीघुसपैठियों की
01
Aug
वंदेमातरम…
भूल गए तहजीब हिन्द कीक्यों शील सभ्यता भूल गये?भूल गए परिपाटी अपनीक्या शिष्ट संयमिता भूल गये?जिन अधरों पर भारत माँ
31
Jul
ये समाज हित थोड़ी है…
तुम गा रहे गुणगान दूसरे केये समाज हित थोड़ी है।तुम ताकत बढ़ा रहे दूसरों कीये समाज रक्षा थोड़ी है।सताया समाज
29
Jul
युवा शक्ति की हुंकार!
छात्रों ने मांगा हक अधिकारदिल्ली में हुई लाठी का बौछार।रामराज के नाम शासक हो रहा मगरूर।रामराज का सपना देखो हो