31
Aug
यह मेरा संशय!
देखा मैंने भूतल परविस्मय ही विस्मयकौन चलाता पवन वेगयह मेरा संशय।।सूरज की किरणों को पाकरदूर भागता अंधकारप्रात: होते ही सूरज
30
Aug
देखे कहाँ विराट विश्व!
(मधुगीति 260822 B) 11:06देखे कहाँ विराट विश्व,सीमित दृग भव;खग मृग के भाव समझे कहाँ,आत्म प्रवाहित!ना जान पाए निज स्वरूप,ना ही
29
Aug
न जाने क्यों…
न जाने क्यों ये अपने ही भरोसा तोड़ जाते है।बड़ी मुश्किल की राहों पर अकेले छोड़ जाते हैं।हमारे हिस्से में