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Apr
हम तो मर गए जीते-जी!
हम तो मर गए जीते-जी, दुनिया में आ के!तुमने जीत पाई भी तो, हमको मिटा के!क्या तुम्हारी नीतियाँ, इंसानियत से
01
Apr
उमंग-तरंग…
(1)जीवन में भर लो उमंगआशा और उम्मीद की उठती रहें तरंगमन-मंदिर में खुशियों के दीप जलें।सुंदर सुगंधित मधुकर फूल गुलशन
01
Apr
मैं कहाँ वो रहा जो था पहले!
(मधुगीति 260327A ) 19:35मैं कहाँ वो रहा जो था पहले,कल कहाँ रहूँगा आज जो हूँ;काल के बदलते प्रवाहों में,देश के
01
Apr
मैं मौन हूं…
मैं मौन हूं बस यही बहुत हैकोई कहे कौन हूं बस इतनाकहूंगा कि मैं मौन हूंन मेरी कमजोरी है न