14
Sep
उलटी गंगा बहाते लोग!
घर के मूर्ति, वृद्ध आश्रम में रहते,माटी की प्रतिमा मंदिर में रहते।कैसा भारत देश है मेरा?उलटी गंगा बहाते लोग।घर के
09
Sep
कारखानों से निकला धुआँ!
कारखानों से निकला धुआँ,शहरों का गंदा पानी!लील रहे ये हवा भूमि जल,गटक रहे जिंदगानी!!जंगल को संरक्षण दीजे,साँसों को ताजगीधन-सम्पदा सफाया
08
Sep
पता ही नहीं चला…
कैसे यह सफर पूरा हो गया,पता ही नहीं चला।क्या पाया, क्या खोया,पता ही नहीं चला।बचपन बीत गया,जवानी भी ढल गई,कब
03
Sep
मानव जीवन मूल्यवान!
केवल भौतिक सुख-सुविधा पर,खर्च न कर नादान!है मानव जीवन मूल्यवान!!आत्म-अवलोकन, चेतना पर भीरख निज-ध्यान!है मानव जीवन मूल्यवान!!तेरी असंख्य उलझनें हैं,दुख-सुख