सत्य जीतता है, न असत्य जीतता है!
कमजोर बुद्धि हारती, संकल्प जीतता है!!
छल-कपट के खेल में, छल-कपट ही खेलता
वीरता से ओतप्रोत, वीर न चाल झेलता
होके चारों-खाने चित्त, दम निकलता है!
कमजोर बुद्धि हारती, संकल्प जीतता है!!
सिर का पल्लू आज भी, खींचा जा रहा है
अग्नि में सतीत्व को, घसीटा जा रहा है
भरी सभा में दुष्ट, अबला अब भी खींचता है!
कमजोर बुद्धि हारती, संकल्प जीतता है!!
वीरता, ज्ञान, मूक-बल, दृष्टा बन निहारता
निर्ममता, क्रूरता के आगे, सरल सत्य हारता
छल के पेंच में उलझ के, शौर्य हारता है!
कमजोर बुद्धि हारती, संकल्प जीतता है!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
सत्य जीतता है, न असत्य जीतता है!
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