संघर्ष, युद्ध में, दो ललकार!
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
पक्षपात नहीं, समरसता हो
हर परिषद में, निष्पक्षता हो
अनीत विरुद्ध, करो प्रहार
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
एक आवाज, एक हुंकार,
धर्म, स्वदेश, पर निसार
जय अहिल्या, जय मल्हार!
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
किसको कहोगे, साथ चलो?
आशा कर, न खुद को छलो
युद्ध का संगी, एक तलवार
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
डूबना हो स्वीकार, तो कूद,
युद्ध करो, बचाओ वजूद
तैर के सागर, कर लो पार
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
भीड़, बहाव में कचरे जैसा,
कुछ भी नहीं है, खतरे जैसा
संकल्प है तो, कैसी मझधार,
चाहे जीतो, या हो हार!
प्रण के आगे, प्राण है क्या?
रक्खो हिम्मत, शौर्य, कटार!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
जय अहिल्या जय मल्हार!
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