ज्ञान, धन, प्रभुत्व में है आगे हर समाज!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
अजंता, अमरनाथ की खोज हमने की
घुसपैठियों की टोह सेनाओं को हमने दी
आ गए हम हाशिए पे, गड़ गए कई राज!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
गोचर गए, गड़रियों से भेड़ छूट गए
बस्तियाँ, दफ्तर बने, रेवड़ ही घट गए
हम घुमंतु, आदिजन, न सुध ले राज-काज!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
शोषण व अन्याय का, संबंध जातिगत
समता का, राष्ट्रवाद का, अनुबंध जातिगत
गाँव क्या संसद में भी, दबती छोटी जात!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
समाज दबे-कुचलों का, जो बोलने लगा
मजबूत, क्रूर पंजा, गला घोंटने लगा
नरसिंह न आए कोई, चाहे मरे प्रहलाद!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
गोचरों को गोचरों से, अलग कर दिया
अभयारण्य, गाँव, मठ, उद्योग भर गया
गड़रियों के हाथों से गई शिक्षा, काम-काज!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
आदि-निवासी, चरित्रवान हम गड़रिये
भेड़, अजा, गाय, भैंस पालें गड़रिये
अनार्य और अनाड़ी कह, ढकेला मनुवाद!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
गोचरों को छीना, श्रेष्ठ सभ्यताओं ने
रक्तबीज बनके घेरा, समस्याओं ने
दर्दभरी चींखें अनसुना किया हर ताज!
उन्नति में सबसे पीछे, हम गड़रिये आज!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
आदि-निवासी चरित्रवान हम गड़रिये!
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