07
Oct
‘क्वार’ माह के दोहे!
नहीं कभी जयकार से,बढ़ता निज सम्मान।खुद की निष्ठा से सदा,होती है पहचान।।1।।कर्म पथों पर जो डटे,रहे वीर बलवान।देखो उनका आज
06
Oct
एक दीप जलाएँ!
आँधियारों से लड़करएक दीप जलाना हैमिलजुलकर दिवाली पर्व मनाना है।नफरत के इस दौर में,प्यार का पुष्प खिलाना हैहर घर-आँगन महकाना
06
Oct
वृद्ध हमारे…
संस्कारों की जड़ें हमारेवृद्ध हुआ करते हैं।मातु-पिता दादा-दादीजो करते परंपरा से,हम वही किया करते हैं।सूर्योदय के पहले वृद्धजग जाया करते
04
Oct
गाँधी स्मृति…
गांधी अपन के देश में,यह आज क्या हो रहा?सब और यहां दमन है,अमन ही तो रो रहा।देखा था जो सपना,सदियों
04
Oct
‘क्वार’ माह के दोहे!
कागज की कश्ती यहांँ,मिट्टी की पतवार।परेशान कल के लिए,बात यही बेकार।।1।।होंठों पर मुस्कान यदि,बदला हो व्यवहार।समझौते हर मोड़ पर,उसने किए