Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

मेरा क्या मेरा है!

(मधुगीति 260701 A) 12:05
मेरा क्या मेरा है,
सब कुछ तो तेरा है;
तैरा है तारा है,
सुर लय हर न्यारा है!
हर कोई सहारा है,
हर कोई हारा है;
वारा है विहरा है,
विरहित बंजारा है!
पत्ता हर प्रणवित है,
थिरकित आह्लादित है;
झंकृत तरंगित है,
आप्लावित छंदित है!
पलकों में झलकों में,
प्राणों की सिहरन में;
स्पंदन हर पुलकित,
तू ही तो गाया है!
छाया समाया है,
चित्त बने धाया है;
ब्रह्म रंध्र ‘मधु’ के बैठ,
स्मित उर मर्मर है!
-गोपाल बघेल ‘मधु’
टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा
www.GopalBaghelMadhu.com

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

संबंधित खबरें

Scroll to Top
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x