बागपत। आज के दौर में जहां भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या लोगों को शारीरिक रूप से कमजोर बना रही है, वहीं कुछ लोग अपनी लगन और अनुशासन से समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के गांव फखरपुर निवासी नवीन पाल (पुत्र स्वर्गीय भगवत प्रसाद) ने, जो वर्तमान में हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज में सब-फायर आॅफिसर के पद पर कार्यरत हैं तथा वर्तमान में पलवल फायर स्टेशन में तैनात हैं। 29 मार्च को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में टाइम्स इंटरनेट द्वारा आयोजित हाफ मैराथन (10 किलोमीटर दौड़) में नवीन पाल ने भाग लिया। इस विशेष अवसर को और भी खास बना दिया उनके 10 वर्षीय पुत्र रुद्रांश आर्यन पाल ने, जिन्होंने पहली बार 2 किलोमीटर की दौड़ में भाग लिया। पिता-पुत्र दोनों ने अपने-अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किए। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है। इस आयोजन के दौरान एक विशेष संदेश भी दिया गया। दौड़ के समय नवीन पाल और उनके पुत्र रुद्रांश ने ‘आॅपरेशन सिंदूर’ लिखी हुई कैप पहनकर हमारे वीर भारतीय सशस्त्र बलों को उनके साहस, समर्पण और देश सेवा के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कदम देशभक्ति और सम्मान की भावना को दर्शाता है। इस आयोजन के दौरान उनके परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे और उनका उत्साहवर्धन किया। इनमें उनकी पत्नी श्रीमती पूजा पाल, पुत्री अनिका पाल, भांजा अर्नव पाल तथा उनके छोटे भाई युवराज पाल और प्रियांशु पाल शामिल थे। परिवार की उपस्थिति ने इस उपलब्धि को और भी यादगार बना दिया। अंत में घर जाकर दोनों पिता-पुत्र ने अपने अपने मेडल अपनी माताजी श्रीमती कमलेश देवी को पहनाकर उनको विशेष सम्मान दिया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। 39 वर्ष की आयु में भी नवीन पाल की फिटनेस के प्रति लगन काबिले-तारीफ है। वर्ष 2026 में यह उनकी तीसरी मैराथन थी। इससे पहले उन्होंने 1 फरवरी को इंडियन नेवी द्वारा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित ‘इंडियन नेवी हाफ मैराथन’ में 10 किलोमीटर की रेस में तथा 1 मार्च को अरावली ट्रेल ब्लैजर्स द्वारा गुरुग्राम में आयोजित ’ट्रेल-ए-थॉन मैराथन’ में 14 किलोमीटर की रेस में भी भाग लिया। रुद्रांश आर्यन पाल का उदाहरण विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। इतनी कम उम्र में खेल और फिटनेस के प्रति उनका उत्साह यह दर्शाता है कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो बच्चे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया में अधिक व्यस्त हो गए हैं, ऐसे में खेल-कूद और दौड़ जैसी गतिविधियां उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं। -ब्यूरो
स्वास्थ्य की ओर बढ़ते कदम : पिता-पुत्र की प्रेरणादायक दौड़