मैंने तीन गृहमंत्रियों को बहुत होश से सुना है और भारत के पहले गृहमंत्री के नाम से सरकारी कार्यलयों मे सतर्कता जागरूकता अभियान मनाया जाता है। और भी लोकतंत्र ने गृहमंत्री दिए, लेकिन सरदार पटेल, लालकृष्ण आडवाणी और अब के अमित शाह। मेरी इच्छा यहाँ कुछ लिखने की नहीं थी, लेकिन सबको, सब कुछ, सबके अनुरूप हो, ऐसा नहीं हुआ है और न ही सम्भव है। लेकिन मूल्यांकन तो समूहों में होते ही रहेंगे। दबाव में भी न डिगने वालों का इतिहास लिखा जाता है। भारत वैचारिक बदलाव के साथ, व्यवस्था परिवर्तन के भी बदलाव में है। जब जहाँ जैसी जरूरत आयी, निर्णय करने पड़ते हैं। कोई कहीं बार-बार नरेटिव बनाकर, झूठ फैलाकर, संविधान-देश बदलने की बात भले करे, लेकिन पक्ष-विपक्ष की जंग सत्ता के लिए जो चल रही है उसमें एक देश एक कानून सब पर लागू होना चाहिए। मेरे अपने गड़रिया, पाल, समाज के लोग जो पूरे देश में तीन प्रकार के हैं- 1. वह एससी धनगर है, 2. वह एसटी भी है और 3. ब्रिटिश गजेटियर में ओबीसी गड़रिया है। हम लोग मंच लगाते हैं तो न जाने भाषणबाजी में कितने माहिर हैं, देखते ही बनता है आज लोकतंत्र में सबसे बड़ा प्रश्न जनसंख्या साधने का है। उम्मीद है क्षमता और समय में हम लोग ठीक कर ले जायें जो समाज के लिए उपयोगी हो, चाहे विचारधारा हो या पाल भवन। उम्मीद है मेरा संकेत लोग समझेंगे और समय में सही करने की यथा कोशिश करेंगे।
-जगदीश प्रसाद पाल, उन्नाव
परास्नातक जनसंचार
मो. 9794866822
लोकतंत्र में सबसे बड़ा प्रश्न जनसंख्या साधने का है!
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