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लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

कहां हैं समाज के ठेकेदार?

देश में गडरिया समाज पर अन्याय व अत्याचारों की खबरों से सोशल मीडिया पटा पड़ा है लेकिन समाज के ठेकेदार इस मामले में लगभग खामोश हैं। यूँ तो देश में गडरिया समाज के छोटे-बड़े हजारों सामाजिक संगठन व अनेक राजनीतिक दल बने हुए हैं लेकिन समाज के लोगों पर अन्याय व अत्याचार की घटनाओं पर रोक लगती दिखाई नहीं दे रही है। हाल ही में 5 अप्रैल को कौशाम्बी में 19 वर्षीय किरण पाल नामक युवती की संदिग्ध हालत में मृत्यु का मामला सुर्खियों में है। लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों के नेताओं के आश्वासनों के बावजूद पीड़ित पक्ष को इंसाफ मिलने की उम्मीद अभी तक नहीं हो पाई है। इससे पूर्व 28 मार्च को औरैया जनपद के पाकरपुरवा गांव में शाम साढ़े पांच बजे पाल समाज की 16 वर्षीय एक युवती के साथ कुछ लोगों द्वारा छेड़खानी किए जाने तथा इसका विरोध करने पर कुल्हाड़ी से सिर फाड़ देने की घटना की सूचना मिली थी। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से जमकर लाठी-डंडे चलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था लेकिन दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। आॅल इंडिया धनगर समाज महासंघ की राष्टÑीय सचिव शिखा धनगर ने इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करते हुए क्षोभ जताया था। उधर, पूर्वांचल के जौनपुर व प्रतापगढ़ आदि जनपदों से गडरिया समाज के भेड़-बकरी पालने वाले लोगों के पशुधन की चोरी की घटनाओं में वृद्धि की सूचनाएं मिल रही हैं। ज्यादातर मामलों में पुलिस द्वारा भेड़-बकरी चोरी की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की जाती और यदि रिपोर्ट दर्ज कर भी ली जाती है तो चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसे में सवाल उठता है कि गडरिया समाज को इंसाफ कौन दिलाएगा?
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!

-निरंजन सिंह पाल

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