चक्रव्यूह में अभिमन्यु सा, घिरा सामाजिक जत्था!
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
खाप पंचायत है, अमर्यादित लोक अदालत
डिग्री रहित वकील करते, पैरवी और वकालत
न्यायाधीश जन साबुत निगलें, निष्ठा, सच, मानवता!
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
बड़ा खौफ होता है, इनके फैसलों का
ब्रह्मलेख जैसा खौफ, इनके चोंचलों का
एक ही लाठी से हांकें ये, बकरी, भेड़, भैंसा!
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
जुर्म करो चाहे जितने, पैसे रख लो उतने
डाँड़ लें नगद नारायण, देना है कहें जितने
गंधर्व विवाह का जोड़ा, कल्पवृक्ष, कामधेनु जैसा!
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
स्वतंत्रता के आठ दशक, लेकिन लोग गुलाम
सभ्य समाज में जारी है, मौखिक हर फरमान
ऐंठी रकम पे अजगर बन के, बैठी खाप व्यवस्था!
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
खाप पंचायत का ही, अब कीजिए बहिष्कार
पारदर्शिता मारी जाए, निर्ममता बनी कटार
सीमित दायरे से बाहर, स्वजातियों से हो रिश्ता
खाप पंचायतों में, ऐंठा जाए मोटा पैसा!!
-जोहन पाल, ओपीएम अमलाई
मो. 7974025985
खाप पंचायत है अमर्यादित!
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