गड़रिया समाज ने हमेशा मेहनत, संघर्ष और आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जिया है। इतिहास गवाह है कि इस समाज ने देश और प्रदेश की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन जब बात राजनीतिक हिस्सेदारी की आती है तो हमारा समाज अक्सर बिखरा हुआ दिखाई देता है। यही बिखराव हमारी ताकत को कमजोर कर देता है। महादेव जानकर साहब समाज के लिए वर्षों से तपस्या और संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा गड़रिया समाज की आवाज को बुलंद करने का प्रयास किया है। आज जब समाज के युवा अलग-अलग दलों में जाकर केवल पिछलग्गू बनकर रह गए हैं, तब यह समय आत्ममंथन का है। इतिहास बताता है कि जब समाज अपनी ताकत भूल जाता है, तब केवल पछतावा ही हाथ आता है। आज सैकड़ों कार्यकर्ता निराश हैं और समाज की उम्मीदें फिर से मजबूत नेतृत्व की ओर टिकी हुई हैं। इसलिए समय की मांग है कि साहसिक निर्णय लिया जाए और समाज को एक दिशा दी जाए। बाबूराम पाल से भी समाज की अपेक्षा है कि वे पुराने मनमुटाव और मतभेदों को भुलाकर समाजहित को सर्वोपरि रखें। ऐरे-गैरे लोगों के साथ गठबंधन करके कोई लाभ नहीं मिलने वाला, इसका अनुभव हम पहले भी कर चुके हैं। यदि गड़रिया समाज के बड़े नेता आपस में बैठकर समझदारी से निर्णय लें, एकजुट होकर प्रत्याशी घोषित करें और समाज को स्पष्ट दिशा दें, तो निश्चित रूप से बड़ा परिवर्तन संभव है। आज एक और बड़ी समस्या यह है कि नेशनल मीडिया गड़रिया समाज की वास्तविक ताकत को कम करके दिखाता है। कई बार हमारी जनसंख्या को केवल 2 से 3 प्रतिशत बताया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश में गड़रिया समाज की आबादी लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक मानी जाती है। इतनी बड़ी संख्या यदि एकजुट होकर निर्णय ले ले, तो प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदलने की ताकत रखती है। अब समय आ गया है कि समाज अपनी शक्ति को पहचाने। बिखराव की राजनीति से ऊपर उठकर संगठन और नेतृत्व को मजबूत करे। आने वाले समय में गड़रिया समाज को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी चाहिए। समाज का स्पष्ट संदेश होना चाहिए कि जो भी दल गड़रिया समाज को सम्मान देगा, नेतृत्व में भागीदारी देगा और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर समाज को स्थान देगा, वही दल समाज का समर्थन पाएगा। अगर गड़रिया समाज एकजुट होकर अपनी राजनीतिक शक्ति का सही उपयोग करे, तो वह दिन दूर नहीं जब समाज केवल वोट बैंक नहीं बल्कि सत्ता का निर्णायक भागीदार बनेगा। यही समय है जागने का, संगठित होने का और अपने अधिकारों के लिए दृढ़ संकल्प लेने का।
-नेमसिंह बघेल, वड़ोदरा
भारतीय रेल सेवा निवृत्त
व पूर्व ट्रेड यूनियन लीडर
मो. 9427343302
गड़रिया समाज की राजनीतिक दिशा और एकता की आवश्यकता!
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