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10 दिवसीय आमरण उपोषण का समापन

मुम्बई। मल्हार योद्धा दीपक बोरेडे द्वारा धनगर समाज के एसटी आरक्षण की मांग को लेकर किया गया 10 दिवसीय आमरण उपोषण 10वें दिन समाप्त हुआ। दीपक बोरेडे ने जालना में सफल आंदोलन के बाद एक बार फिर 16 मार्च से महाराष्ट्र विधानमंडल सत्र के प्रथम दिन से ही मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान (बीएमसी मुख्यालय, सीएसटीएम के सामने) यह आंदोलन शुरू किया। इन 10 दिनों के दौरान न तो सरकार के किसी जिम्मेदार अधिकारी ने और न ही सत्तापक्ष या विपक्ष के किसी प्रमुख नेता ने आंदोलन की ओर ध्यान दिया। जब विधानसभा सत्र समाप्त हुआ, तब सत्ताधारी दल के नेताओं और एक कैबिनेट मंत्री ने स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने यह कहकर आश्वासन दिया कि चूंकि आरक्षण का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए राज्य सरकार फिलहाल कोई ठोस निर्णय या घोषणा करने की स्थिति में नहीं है। एक बार फिर वही आश्वासन दिया गया कि राज्य सरकार धनगर समाज के साथ है और न्याय दिलाने के लिए न्यायालय में पूरी मजबूती से पक्ष रखा जाएगा। लेकिन इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक बात यह रही कि धनगर समाज के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के गड़रिया समाज के भाई-बहनों ने राज्य और भाषा की सीमाओं को पार करते हुए पूरे 10 दिनों तक एकजुट होकर आंदोलन का समर्थन किया। यह आंदोलन केवल मांग का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि इसने सरकार को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘जब बात समाज की होती है, तो सब एक हैं—संगठित, सजग और संकल्पित।’ एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। -महेंद्र पाल

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