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जीवन के रस-रंग

अति मनमोहक हैं जीवन के रंग-रस
बल बुद्धि विद्या कला ज्ञान और यश
समझ नहीं पाया कोई विधि का विधान
साधु संत ज्ञानी ध्यानी और विद्वान।
मेहनत लगन ईमानदारी धैर्य साहस
और उमंग संस्कार संस्कृति सभ्यता
जीवन के हैं रस-रंग
सुख-दुख आशा निराशा सफलता असफलता सब हैं जीवन के अंग
कर्म धर्म सुख शांति संतुष्टि है
जीवन के महकते मधुर रस-रंग।
प्रोफेसर (इंजीनियर) भजनलाल हंस बघेल
प्रिंसिपल, जीवीएन पॉलिटेक्निक
कॉलेज, पलवल, हरियाणा
मो. 9588523484

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