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पाल धनगर गड़रिया समन्वय समिति ने लिए कई अहम निर्णय

मुम्बई। 12 जुलाई को पाल धनगर गड़रिया समन्वय समिति की मासिक बैठक सफलतापूर्वक आयोजित हुई। प्रत्येक माह की भाँति यह बैठक प्रथम रविवार को होनी थी, किन्तु मुंबई में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण इसे द्वितीय रविवार को आयोजित किया गया। बैठक प्रात: 10:30 बजे समिति के अध्यक्ष ईश्वरदेव पाल के मार्गदर्शन एवं उत्तर प्रदेश से पधारे आचार्य विजयबहादुर पाल की विशेष उपस्थिति में समयानुसार प्रारंभ हुई। प्रार्थना एवं शपथ के पश्चात समिति की परंपरा के अनुसार गत माह दिवंगत हुए समाजजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समाज के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य हेतु पुस्तक बैंक स्थापित करने के उद्देश्य से समन्वय समिति ने पाल विकास संघ एवं पाल सेवा संघ से उनके संरक्षण में उपलब्ध समाज की संपत्तियों के उपयोग की अनुमति मांगी थी। पाल सेवा संघ ने सकारात्मक उत्तर देते हुए अनुमति प्रदान कर दी। निरीक्षण के दौरान समिति ने उस भवन का अवलोकन किया, किन्तु वर्तमान परिस्थितियों में वह पुस्तक बैंक के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। दूसरी ओर, भायंदर स्थित समाज का फ्लैट, जो पाल विकास संघ के संरक्षण में है, पुस्तक बैंक प्रारंभ करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त एवं सुविधाजनक है। दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि पाल विकास संघ के नेतृत्व में राजाराम पाल लगातार इस विषय पर टालमटोल की नीति अपना रहे हैं। कई बैठकों में उन्होंने केवल यही कहा कि वे समिति से चर्चा करेंगे, किन्तु आज तक न तो समिति में विषय रखा गया और न ही समन्वय समिति को कोई संतोषजनक उत्तर दिया गया। समाज पूछता है कि आखिर समाज की संपत्ति का उपयोग समाज के विद्यार्थियों के हित में करने से किसे और क्यों आपत्ति है? समिति की बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष को सामाजिक एवं कानूनी स्तर पर आवश्यक सभी कार्यवाही करने का पूर्ण अधिकार प्रदान किया, ताकि समाज की संपत्ति पर समाज के अधिकार को सुनिश्चित करते हुए पुस्तक बैंक शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। यह स्पष्ट कर दिया गया कि पाल विकास संघ केवल संरक्षक है, मालिक नहीं। समाज की संपत्ति पर अंतिम अधिकार पूरे समाज का है, किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं। बैठक के समापन पर आचार्य विजयबहादुर पाल का शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘समाज की धरोहर समाज को ही समर्पित होनी चाहिए। संरक्षक का कार्य संरक्षण करना है, अधिकार जताना नहीं। किसी को भी समाज को उसकी अपनी संपत्ति के उपयोग से वंचित करने का नैतिक अधिकार नहीं है।’ उन्होंने समाज में एकता, संगठन और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। अब समय आ गया है कि समाज की संपत्ति समाज के हित में उपयोग हो। व्यक्तिगत हठ नहीं, सामूहिक हित सर्वोपरि होना चाहिए। समाज जाग चुका है और अपने अधिकार के लिए पूरी मजबूती से आगे बढ़ेगा। -ब्यूरो

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महेंद्र

सच्ची तथा निष्पक्ष खबर तथा जानकारी समस्त समाज तक पहुचाने हेतु आभार

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