धूप-छांव का संगम जिंदगी,
एक हवा का झोंका जिंदगी।
गम, मुश्किलें, असफलताएं,
साथ अपने लिए जिंदगी।
कही, अनकही बातों की
लिखी किताब सी जिंदगी।
निश्चित कोई ठिकाना नहीं,
पानी का बुलबुला जिंदगी।
रंजोगम में भी मुस्कुराए,
वही तो है असली जिंदगी।
सफर-दर-सफर हमसफर,
मिला नेक हमसफर मजा जिंदगी।
कभी अपनों, कभी परायों के वास्ते,
जीते रहो जब तक मिली जिंदगी।
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव-रिहावली, डाक-तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा-283111
मो. 9627912535
जिंदगी…
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