दो वक्त की रोटी मिले, दो खोली का मकान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
जीवनभर सोचे, कहाँ मूल सुविधाएँ मेरी
गोचरों से गोचर ही छीने, भेड़, अजा न गायें मेरी
चर गईं आबादियाँ सभी, चौपायों के मैदान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
अग्रणी धनिक सत्ता में हैं, मनोबल में उड़ान
शासकों की नीतियाँ, फूँकती इनमें प्राण
चिथड़ों के चंदे चढ़ावे, मखमलों की शान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
इनके ही बच्चे कुपोषित, इनसे छप्पन भोग
इनसे ही अजान स्तुति, इनको ही दुख-रोग
चींखें इनकी सत्ता सुने, न कराह भगवान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
धनिकों के हाथों में अफसर, नेताओं की डोर
और गरीबी दौडेÞ, चौखट छोड़ के इस-उस ठौर
रहा-सहा थोड़े जोड़े, पैसों को कर दिए दान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
छोटी गरीब जातियाँ, पूंजीवाद से दबीं सदा
अग्रणियों का शोषण जारी, अब भी तब से सदा
स्वर्ग-नर्क अरु पुनर्जन्म के, गहरे शस्त्र संधान!
हर गरीब की जिंदगी, दो खोज में हलकान!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985
हर गरीब की जिंदगी!
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