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सेवा संकल्प अभियान में योगाचार्य महेश पाल को मिला विशेष योग सम्मान

गुना। आयुष विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित विशेष योग सत्र एवं योग सम्मान कार्यक्रम में योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राष्ट्रीय योगासन निर्णायक योगाचार्य महेश पाल को जिला आयुष अधिकारी द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें योग के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, बच्चों एवं युवाओं को योग से जोड़ने, योगासन खेलों को प्रोत्साहित करने तथा समाज में योग की वैज्ञानिक उपयोगिता का प्रचार-प्रसार करने के लिए दिया गया। योग के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए योगाचार्य महेश पाल स्वास्थ्य जागरूकता, योग शिक्षा, खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और अनुसंधान के माध्यम से योग के प्रभावों को समझने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। योगाचार्य महेश पाल का मानना है कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता, अनियमित खानपान, नींद की कमी और बढ़ते मानसिक तनाव के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में योग, प्राणायाम और ध्यान को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह श्वसन क्षमता, शारीरिक संतुलन, एकाग्रता, तनाव प्रबंधन और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होता है। इसी उद्देश्य से योगाचार्य महेश पाल लंबे समय से गुना स्थित गायत्री मंदिर में विभिन्न योगसत्रों के माध्यम से लोगों को उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करा रहे हैं जिसमें कई लोगों ने अपने स्वास्थ्य में सुधार किया है। उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉयड, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओडी, फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द, साइटिका, तनाव, माइग्रेन, गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं से परेशान लोग भी ठीक हुए हैं। बच्चों की शारीरिक फिटनेस और विकास में भी काफी परिवर्तन हुआ है। योगाचार्य महेश पाल के अनुसार, प्राणायाम का अभ्यास केवल सांस लेने और छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें श्वास की गति, गहराई, लय और नियंत्रण का विशेष महत्व है। प्राणायाम को पूरक, कुंभक, रेचक और अंत:कुंभक और बाह्यकुंभक के साथ अभ्यास करने पर कई अनगिनत लाभ मिलते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो धीमी एवं नियंत्रित श्वास का अभ्यास स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की गतिविधियों, हृदय गति और तनाव संबंधी प्रतिक्रियाओं को लाभ पहुंचता है। नियमित योगाभ्यास से कुछ लोगों में रक्तचाप नियंत्रण, शारीरिक कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। योगाचार्य महेश पाल का कहना है कि प्रत्येक आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, षट्कर्म, षट्चक्र एवं नाड़ियों का अभ्यास उसकी सही तकनीक, उचित क्रम, शारीरिक क्षमता और आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए। योगाचार्य महेश पाल केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि योगासन खेलों के माध्यम से बच्चों एवं युवाओं की प्रतिभा को निखारने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर योगासन प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका निभाने के साथ वे बच्चों को प्रतियोगिताओं के लिए प्रशिक्षित करने और उन्हें जिला स्तर से आगे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अनेक बच्चों को योगासन खेलों के प्रति प्रोत्साहन मिला है और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर प्राप्त हुए हैं। योगासन खेलों के माध्यम से बच्चों में लचीलापन, संतुलन, एकाग्रता, अनुशासन, आत्मविश्वास और नियमित अभ्यास की आदत विकसित करने में मदद मिली है। वर्तमान समय में जब बच्चों का अधिक समय मोबाइल और स्क्रीन पर व्यतीत हो रहा है, तब उन्हें खेल, योग और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना उनके समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। योगाचार्य महेश पाल योग के क्षेत्र में अपनी साधना और निरंतरता के लिए भी पहचाने जाते हैं। वे 21,000 सूर्य नमस्कार पूर्ण करने की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय योगासन निर्णायक के रूप में वे विभिन्न स्तरों की प्रतियोगिताओं में अपनी भूमिका निभाते हैं। योग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि वे स्वास्थ्य पर योग के प्रभावों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने के उद्देश्य से अनुसंधान कार्य कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि योग की पारंपरिक पद्धतियों और आधुनिक वैज्ञानिक समझ के बीच समन्वय स्थापित करते हुए लोगों तक अधिक प्रभावी एवं प्रमाण-आधारित योगाभ्यास की जानकारी पहुंचाई जा सके। हरिकमल दर्पण परिवार की ओर से उन्हें इस उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ। -सम्पादक

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