युद्ध होते रहेंगे पृथ्वी तल!
(मधुगीति 260326)युद्ध होते रहेंगे पृथ्वी तल,लहरें बहती रहेंगी हर पल जल;चिंगारी कितनी जलें अग्नि उर,वायु कितनी बहेंगी शून्य सिहर!फुहारें कितनी
जिंदगी की किताब
(1)‘रंगमंच’ की सादगी 'ओटीटी' के दौर में भी जीवित है।थिएटर को एक्टिंग का स्कूल कहा जाता है।अच्छा इंसान बनने के
जीवन के रस-रंग
अति मनमोहक हैं जीवन के रंग-रसबल बुद्धि विद्या कला ज्ञान और यशसमझ नहीं पाया कोई विधि का विधानसाधु संत ज्ञानी
काश! ये संभव होता!
काश! ये संभव होता, अर्थी अपनी खुद ढोता!मैं चार कांधे लेता, न ओढ़ कफन चुप सोता!शव होता सिंहासन पर, सजते
मेरी साइकिल…
सरपट-सरपट दौड़ लगातीनित व्यायाम खूब करातीगांव-गांव, गली-गली घुमातीमेरी साइकिल खूब सैर कराती।बिना ईंधन के चलती जातीमन मेरा खूब बहलातीसाथ-साथ बौझा