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डॉ. प्रभु चौधरी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। देश-विदेश में नागरी लिपि का प्रचार-प्रसार करने वाली प्रतिनिधि संस्था नागरी लिपि परिषद की मध्य प्रदेश इकाई के प्रभारी डॉ. प्रभु चौधरी के निधन पर परिषद मुख्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. प्रभु चौधरी परिषद के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक थे। वर्ष 1990 में परिषद से जुड़ने के उपरांत डॉ. चौधरी नागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में सक्रियता के साथ जुट गए। लगभग एक हजार से अधिक लेख उन्होंने नागरी लिपि पर केंद्रित लिखे, जो देश के विभिन्न अंचलों से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर सम्मान सहित प्रकाशित हुए। नागरी लिपि पर सर्वाधिक लेख लिखने का उन्हें श्रेय प्राप्त है। डॉ. चौधरी नागरी लिपि परिषद सहित अनेक राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं से सक्रियता के साथ जुड़े हुए थे। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त राजीव कुमार पाल, पूर्व जीएसटी आयुक्त उत्तर प्रदेश आरएन पाल, दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी राजेन्द्र कुमार और कृष्णा कर्तव्य सहित अनेक शुभचिंतकों ने डॉ. प्रभु चौधरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आभासी माध्यम से नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रेमचंद पातंजलि, उपाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा, संयुक्त मंत्री डॉ. इस्पाक अली, कोषाध्यक्ष आचार्य ओमप्रकाश, आईसीएसएसआर के कार्यक्रम निदेशक सुनील कुमार सिंह, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के डॉ. अमित वर्मा, हैदराबाद के चवाकुल रामकृष्ण राव, डॉ. साकेत सहाय, चेन्नई की डॉ. राजलक्ष्मी कृष्णन, डॉ. टी नजीम बेगम, आर श्रीदेवी, तिरुवनंतपुरम से डॉ. सीजे प्रसन्नकुमारी, असम की डॉ. जोनाली बरुआ, झारखंड की पूर्व प्राचार्य डॉ. शारदा प्रसाद, डॉ. अशोक अभिषेक, इंदौर के पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक कुमार भार्गव, भुवनेश्वर से हरिराम पंसारी, मैसुरु से डॉ. रामनिवास साहू, डॉ. नागनाथ भेंडे, डॉ. जयशंकर यादव, नारनौल से डॉ. रामनिवास मानव, पुणे से डॉ. रणजीत सिंह अरोड़ा, गुजरात से डॉ. दिनेश सिह, डॉ. बीजे पटेल ब्रजेश, डॉ. संगीता पाल, रायपुर से डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. मुक्ता कौशिक, बस्तर से अंजली मिश्रा, कोलकाता से डॉ. शिप्रा मिश्रा सहित अनेक नागरी लिपि प्रेमियों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। -डॉ. हरिसिंह पाल

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