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भ्रष्टाचार के फूल…

भ्रष्टाचार के फूल हैं
लोकतंत्र के शूल हैं
कुछ नेता मेरे देश के।
खा रहे हैं गाली
जा रहे हैं जेल
फिर भी देश को
लूटने में मशगूल हैं।
कुछ नेता मेरे देश के।
भ्रष्टाचार इतना कि
पशु-पक्षी के मांस का
देश-विदेश में हो रहा व्यापार।
दारू, गांजा, अफीम का धंधा
फल-फूल रहा है देश में,
हो रहे अपमानित जन-जन में,
फिर भी मांस मदिरा का व्यापार
बंद नहीं करते नेता मेरे देश के।
भ्रष्टाचार के फूल हैं
लोकतंत्र के शूल हैं
कुछ नेता मेरे देश के।
-नारायण प्रसाद पाली
प्रांतीय प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़
मो. 9575761235

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