आज अगर साहित्य और सिनेमा की बात की जाये तो मुकेश कुमार ऋषि वर्मा के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक ग्रामीण कृषक परिवार में जन्मे ऋषि वर्मा ने पारिवारिक समस्याओं से जूझते हुए साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। करीब 40 पुस्तकों की रचना की है व 54 से अधिक फिल्म, टेली फिल्म, शॉर्ट फिल्म, एल्बम्स, बेव सीरीज में अभिनय, निर्देशन और निर्माण आदि का कार्य किया है। उन्होंने कई प्रोजेक्टों में कैमरामैन का कार्य भी किया है। हालांकि उन्हें विशेष पहचान नहीं मिल पाई, क्योंकि अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट रिलीज ही नहीं हो पाए। इसीलिए वे वह मुकाम हासिल नहीं कर पाए जिसे सफलता कहते हैं। ऋषि वर्मा ने हिंदी, ब्रजभाषा, हरियाणवी, हिमाचली, भोजपुरी, राजस्थानी आदि भाषाओं वाले सिनेमा में अभिनय किया। उनके द्वारा अभिनय किये गए प्रोजेक्टों पर प्रकाश डालते हैं- 1-दिल मंगदा (2009)- हिमाचली गीतमाला/ एल्बम, 2- फौलादी वीर (2010)- बृजभाषी टेली फिल्म, रिलीज नहीं हो पाई, 3-दबंगू (2011) बृजभाषी टेली फिल्म, 4-होली में घंटोली (2012) व 5- खायले जोगन चुस्की (2012) बृजभाषी एल्बम्स, इन दो एल्बमों ने मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़ आदि पूरे ब्रज क्षेत्र में काफी लोकप्रियता हासिल की, 6- बदला एक इंसाफ (2013) हॉरर टेली फिल्म, 7-पागलपंती (2014) रिलीज नहीं हो पाई, 8-पहल (2017) हिंदी फीचर फिल्म, रिलीज नहीं हो पाई, 9-शुभ दीपावली (2017) शॉर्ट फिल्म, 10-जागरूक मतदाता (2017) शॉर्ट फिल्म, 11-मंत्री जी का बयान (2017) शॉर्ट फिल्म, इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसकी कहानी स्वयं मुकेश कुमार ऋषि वर्मा ने लिखी, 12-ज्योति जलाने आये हैं (2018) धार्मिक एल्बम, इस एल्बम का निर्माण स्वयं मुकेश कुमार ऋषि वर्मा ने किया व अभिनय भी किया, 13-डर (2018) शॉर्ट फिल्म, 14- शूद्र अ लव स्टोरी (2018) हिंदी फीचर फिल्म, इस फिल्म में मुकेश ने मुख्य अभिनेताओं के मामा का किरदार निभाया था। यह फिल्म पूरे भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई थी, 15-साजना (2018) हिंदी एल्बम, 16-जो आई जाटणी जोश में (2018) हरियाणवी एल्बम, इस एल्बम ने यूट्यूब पर मिलियन से अधिक न्यूज पाये थे, 17-मोतीहारी से कांवर उठा ल (2018) भोजपुरी एल्बम, 18-कांटों बेरी लागो… (2018) बृजभाषी एल्बम, 19-अपना वतन (2018) देशभक्ति एल्बम, 20-वो नाम (2018) हिंदी एल्बम, 21-सूट पटियाला (2018) हरियाणवी एल्बम, 22-यमला पगला दीवाना (2018) हिंदी एल्बम, 23-लांगुर… (2018) बृजभाषी एल्बम, 24-ए. सी. कमरा… (2018) बृजभाषी एल्बम, 25-आंखें तेरीं (2018) बृजभाषी एल्बम, 26-झूठों कर दियो वादो (2018) बृजभाषी एल्बम, 27-तू है कि नहीं (2018) हिंदी एल्बम, 28-शादी (2018) राजस्थानी एल्बम, 29-भूतों का तांडव (2018) हॉरर टेली फिल्म, 30-शैतानी जंगल (2018) हॉरर टेली फिल्म, 31-खूनी जंगल (2018) हॉरर टेली फिल्म, 32- लालच (2018) हॉरर वेब सीरीज, 33-तुम मिले (2018) हिंदी एल्बम , 34-हैप्पी न्यू ईयर (2019) शॉर्ट फिल्म, 35-पंडित जी की बकरी (2019) शॉर्ट फिल्म, 36-क्या हुआ (2019) कवर सॉन्ग, 37-बादल (2019) बृजभाषी एल्बम, 38-भक्ति में शक्ति (2019) लघु फिल्म, 39-शराब है खराब (2019) शॉर्ट फिल्म, 40-पतरे… (2019) बृजभाषी एल्बम, 41- धमक (2019) बृजभाषी एल्बम, 42-पानी की टोंटी (2019) शॉर्ट फिल्म, पानी बचाओ अभियान पर जागरूक करती फिल्म, 43-दहेज एक दानव (2019) टेली फिल्म, दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर बनी फिल्म, 44-चल दिये भोलेनाथ (2019) धार्मिक एल्बम, 45-भरत सिंह के प्रवचन (2019) लोक कथा- वीडियो फिल्म, 46-बेवफाई (2019) प्रेम गीत, 47-लांगुरिया… (2020) बृजभाषी एल्बम, 48-वीआईपी की चाय (2021) कॉमेडी शॉर्ट फिल्म, 49-निठल्ले (2021) हास्य लघु फिल्म, 50-भय का भूत (2021) अंधविश्वास की कमर तोड़ती शॉर्ट फिल्म, 51-गुनताडे़ वाले बाबा भाग-1 व भाग-2 (2021) टेली फिल्में, 52-हम सब भूत हैं (2022) हॉरर फिल्म, 53-गप्पू और पप्पू की धमाचौकड़ी (2022) हास्य धारावाहिक, 54-खून का रिश्ता (2025) टेली फिल्म, हिंदू त्यौहार रक्षाबंधन पर बनी इस फिल्म ने काफी लोकप्रियता हासिल की। अब उनके द्वारा साहित्य में दिए गए योगदान पर प्रकाश डालते हैं- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा ने करीब 40 से अधिक पुस्तकों की रचना की है। हजारों रचनाएं देश के लगभग सभी राज्यों से व अमेरिका, चीन, नेपाल, जापान आदि देशों से भी रचनाएं प्रकाशित हुईं हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें- 1-आजादी को खोना ना, 2-संघर्ष पथ, 3-काव्य दीप, 4-जंगल की इज्जत, 5-चुलबुली कविताएं, 6-उगता सूर्य आदि हैं।
संपादन कार्य-कालेश्वर ज्योति, कालिका दर्शन, भूमिपुत्र, ममता की मूरत, श्रीराम रतन धन, राष्ट्रीय सृजनकार, गिना काव्य मंजूषा, युवा धड़कन, एकलव्य दर्पण आदि। इसके साथ ही बोहल शोध मंजूषा, गीना शोध संगम, शोध समालोचन व रिसर्च जर्नल आॅफ मीमांसा जैसे प्रतिष्ठित शोध जर्नलों में प्रबंध संपादक का दायित्व निभा रहे हैं।
निष्कर्ष-यह कहा जा सकता है कि मुकेश कुमार ऋषि वर्मा ने साहित्य व सिनेमा में एक महत्वपूर्ण योगदान तो अवश्य ही दिया है। आज भले ही उन्हें वह पहचान प्राप्त नहीं है जो एक सफल अभिनेता, साहित्यकार को होती है। शायद इसीलिए मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एक गुमनाम नाम हैं। परंतु उनके योगदान को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
संदर्भ सूची-1-बोहल शोध मंजूषा, 2-गीना शोध संगम, 3-शोध समालोचन, 4- रिसर्च जर्नल आॅफ मीमांसा, 5-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा द्वारा रचित साहित्य, 6-गूगल सर्च इंजन, ए आई, यूट्यूब, फेसबुक, विकिपीडिया आदि।
-डॉ. नरेश कुमार सिहाग एडवोकेट
साहित्य और सिनेमा का संगम हैं मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
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