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जिंदगी की किताब

(1)
‘रंगमंच’ की सादगी ‘ओटीटी’ के दौर में भी जीवित है।
थिएटर को एक्टिंग का स्कूल कहा जाता है।
अच्छा इंसान बनने के लिए बहुत वक्त देना पड़ता है।
‘नेशनल स्कूल आफ ड्रामा’ (एनएसडी)
जिंदगी की किताब है कला।
परिश्रम से ही जीवन में होता भला।
इधर-उधर की टालो बला।
सत्य-पथ पर जीवन फूला-फला।
(2)
किस्मत के पन्ने पलटने में वक्त लगता है।
समय का पहिया धीरे-धीरे चलता है।
घोर अंधेरे के बाद सूरज अवश्य चमकता है।
संघर्षों से ही सफलता-मार्ग दमकता है।
जो परिश्रमी है वही सब कुछ प्राप्त करता है। प्रतिभा जाति पर निर्भर नहीं करती।
-प्रोफेसर (इंजीनियर) भजनलाल हंस बघेल
प्रिंसिपल, जीवीएन पॉलिटेक्निक
कॉलेज, पलवल, हरियाणा
मो. 9588523484

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