पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिससे न केवल हमारे समाज की पहचान बनी बल्कि शान भी बढ़ी। लेकिन न जाने क्यों हमारे समाज के कुछ युवाओं की रंग में भंग डालने की जिद सारे किए धरे पर पानी फेर देती है। इस वर्ष भी कई स्थानों से ऐसे ही समाचार मिले हैं जिनमें कुछ युवाओं की नासमझी के कारण आयोजकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इन्दौर के मुरार में आयोजित कार्यक्रम में तो कुछ युवा पुलिस से ही भिड़ गए जिसके कारण लगभग दस युवकों को मुकदमे का दंश झेलना पड़ेगा। मुजफ्फरनगर में स्टंटबाजी के चक्कर में पांच युवकों की गिरफ्तारी हुई। इसी प्रकार अलीगढ़ में सात युवकों पर मुकदमा दर्ज किया गया। सहारनपुर में भी बिना अनुमति शोभायात्रा निकालने को लेकर आयोजकों की पुलिस से काफी नोकझोंक हुई जिसके बाद बिना झांकियों के ही शोभायात्रा निकाली गई। दरअसल, हमारे समाज के कुछ युवा जोश में होश खो बैठते हैं जिसके कारण न केवल हमारे सामाजिक नेताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है बल्कि पुलिस-प्रशासन के सामने शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है। पता नहीं क्यों इस बात को हमारे समाज के युवा समझने के लिए तैयार नहीं होते। मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इस बार भीड़ ने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए लेकिन अनुशासन की कमी के कारण आयोजकों की बार-बार अपील के बावजूद बड़ी संख्या में युवा हॉल में व बाहर घूमते रहे। कितना अच्छा होता कि यदि सभी लोग अनुशासन के साथ सभागार में बैठकर वक्ताओं की बातों को सुनते और समझते। लेकिन मात्र कुछ लोगों की नादानी के कारण सारा मजा किरकिरा हो गया। ये कुछ छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन इनका असर बड़ा होता है। आशा है समाज के लोग, खासकर युवा इसे समझने का प्रयास करेंगे।
इस हफ्ते इन्हीं शब्दों के साथ जय पाल समाज!
-निरंजन सिंह पाल
रंग में भंग डालने की जिद क्यों?
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