Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

डेयरी महाविद्यालय में विश्व दुग्ध दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया

बीकानेर। यहां डेयरी महाविद्यालय राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने विश्व दुग्ध दिवस 1 जून को बडेÞ ही हर्षोल्लास से मनाया। डेयरी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. राहुल सिंह पाल ने बताया कि पहली बार इस कार्यक्रम में डेयरी वैज्ञानिकों, डेयरी इंजिनियरों, डेयरी किसानों, डेयरी के क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यवसायियों व डेयरी के भविष्य (छात्र-छात्राओं) ने एक साथ एक मंच पर एकत्रित होकर विश्व दुग्ध दिवस मनाया जिसमें डेयरी के विभिन्न उत्पादों जैसे एनर्जी मिल्क, फ्लेवर्ड मिल्क, लस्सी, छाछ, आइसक्रीम जैसे उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही इनके स्वाद का भी आनंद लिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने दुग्ध उत्पादन से जुडे किसानों, ग्रामीण महिला, दुग्ध उत्पादकों, डेयरी व्यवसायियों, अधिकारियों व डेयरी इंजिनियरों के योगदान की सराहना की तथा बताया कि इन्हीं के सतत प्रयास से ही आज भारत दुनिया में दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर विराजमान है। इनके सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है तथा सभी को मिल-जुलकर और मेहनत से कार्य करना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को उच्चतम स्तर तक पहुँचाया जा सके। डेयरी महाविद्यालय बीकानेर के अधिष्ठिाता प्रो. राहुल सिंह पाल ने अपने उद्बोधन में दुग्ध की गुणवत्ता व पोषक मानकों के महत्वों पर विस्तार से बताते हूए कहा कि दुग्ध न सिर्फ हमारे जीवन का अभिन्न अंग है बल्कि दिन की शुरूआत एक कप दूध की चाय के सेवन से शुरू होकर रात्रि के सोने से पहले एक गिलास दूध पर ही समाप्त होती है। दूध हमारे जीवन का सम्पूर्ण आहार माना जाता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज तत्व व विटामिन्स के अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी भी पाया जाता है। दूध व दूध के पदार्थों से बने विभिन्न आईटम जैसे पनीर, विभिन्न प्रकार की मिठाईयां, फ्लेवर्ड मिल्क, दही, लस्सी, छाछ, रायता व आइस्क्रीम के बिना कोई भी शुभ समारोह पूर्ण नहीं होता। उन्होने आगे बताया कि बावजूद इसके अपने देश में प्रति दिन प्रति पशु दूध उत्पादन विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, इसे बढ़ाने के लिए हमें मिल-जुलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। इसके लिए पशुओं को आवश्यक पोषक तत्वों से निर्मित पशु आहार खिलाना होगा, साथ ही हरे चारे की मात्रा पशु आहार में बढ़ानी होगी तथा नस्ल सुधार हेतु कृत्रिम गर्भाधान अपनाना होगा तथा लिंग वर्गीकृत वीर्य (सेक्स सोरटेड सीमन) व प्रतिरूपण (क्लोनिंग) जैसी भी तकनीकों का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को करना होगा। इसके अलावा पर्यावरण सुधार हेतु चारे वाले वृक्षों को लगाएं ताकि पशुओं को चारा तो मिले ही साथ ही पर्यावरण संतुलन में भी हमें सहयोग मिल सके। विशिष्ट अथिति डॉ. ए.के. पूनिया निदेशक एन.आर.सी.सी. व अमूल डेयरी के प्रबन्धक बाबूलाल विश्नोई ने भी विश्व दुग्ध दिवस पर सम्बोधित किया। डेयरी के क्षेत्र में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों, पशुपालकों, अधिकारियों व छात्र-छात्राओें को पुरस्कृत भी किया गया। -ब्यूरो

1 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

संबंधित खबरें

Scroll to Top
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x