Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

आंगन में दीवार उठाओगे!

बर्तन सम टकराकर,
आंगन में दीवार उठाओगे!
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
अपना हित, नुकसान गैर का,
ऐसा जीवन मत जीना
निर्झर झरना, नदिया बनना,
परहित का मधुरस पीना
सबका हित, अपना हित समझो,
तब तो सरल कहाओगे!
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
हम समाज के अभिन्न हिस्से,
अपनी भूमिकाएँ जानें
नैतिकता, व्यवहारिकता में,
पारदर्शिता पहचानें
परोपकार का भाव न हो तो,
अहंकारी बन जाओगे!
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
स्वयं के जीवन में चाहो
अपनत्व, तो अपनापन बांटो
संरक्षण, पोषण है जरूरी,
इन्हें काटकर न पाटो
निर्मलता, सौंदर्य, स्वच्छता,
बिन रोपे कहाँ पाओगे?
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
अंकुर बिन कैसे कोई दाना,
वट सम जड़ें जमाएगा
न शीतलता दान करेगा,
न एक क्षुधा मिटाएगा
मिटकर भी जीवन पा जाओ,
कब वो भाव जगाओगे?
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
बर्तन सम टकराकर,
आंगन में दीवार उठाओगे!
बाहर एक स्वर में चिल्लाओ,
जग में धूम मचाओगे!!
-जोहन पाल, सेंदरी, बिलासपुर
मो. 7974025985

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

संबंधित खबरें

Scroll to Top
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x