Harikamaldarpan

लोड हो रहा है... लोड हो रहा है...

मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ!

(मधुगीति 260617) 01:58
मैं मुक्त हूँ, अभिव्यक्त हूँ,
अनुभूत हूँ, अणु भूत हूँ;
सापेक्ष सुर, संभूत हूँ,
निरपेक्ष सत्ता, स्रोत हूँ!
ना लिप्त हूँ, ना लुप्त हूँ,
ना गुप्त हूँ, ना ज्ञेय हूँ;
धारणा ना मैं ध्येय हूँ,
ना ध्यान में अज्ञेय हूँ!
ना सुप्त, ना ही जागृत,
ना तृप्त औ ना आप्लुत;
मैं सनातन, शाश्वत सतत,
अनुरक्त आनन्दित रमत!
अभिनव अमित आलोक चित,
स्मित बदन स्फुर जगत;
पल-पल बदल प्रकृति लखत,
संसार सागर रस चखत!
आवत लहर, जावत कहर,
हर पहर प्रज्ञा पल्लवत;
‘मधु’ महत की लोरी सुनत,
प्रभु प्रबंधन मैं प्रमित हूँ!
-गोपाल बघेल ‘मधु’
टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा
www.GopalBaghelMadhu.com

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