राजस्थान में अति पिछडा वर्ग के विकास के लिए देवनारायण बोर्ड बनाया गया था, जिसका बजट भजनलाल सरकार ने 100 करोड़ रुपये बढ़ाया है। केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राजस्थान के देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओम प्रकाश भडाना ने अति पिछडा वर्ग समाज के लिए गठित देवनारायण बोर्ड की उपलब्धियां बताई हैं। भडाना ने बताया कि गुर्जर, गडरिया सहित पांच अति पिछड़ी जातियों के विकास और उत्थान के लिए देवनारायण बोर्ड का गठन किया गया था, लेकिन पिछली सरकार ने इन जातियों के विकास के लिए समुचित कार्य नहीं किया। राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद अजमेर के ओमप्रकाश भडाना को देवनारायण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। इस बोर्ड का पूर्व में जो बजट 350 करोड़ रुपए था उसे बढ़ाकर 450 करोड़ रुपये किया गया। अति पिछड़ा वर्ग की इन जातियों के बच्चों को शैक्षिक दृष्टि से योग्य बनाने के लिए आवासीय विद्यालयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले 14 वर्ष में 22 आवासीय विद्यालय खोले गए, जबकि वर्तमान सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 10 विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है, इनमें से तीन विद्यालय और एक छात्रावास अजमेर जिले में खोला जा रहा है। गुर्जर गडरिया सहित पांच जातियों के बच्चे इन आवासीय विद्यालयों में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यही वजह है कि आज राजस्थान के अतिपिछड़ा वर्ग में शैक्षिक स्तर में तेजी से वृद्धि हुई है और अब प्रतियोगी परीक्षाओं में इस वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में चयनित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समय-समय पर बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी लेते हैं। मुख्यमंत्री को जब भी बोर्ड का कोई काम बताया, तब सीएम ने हाथों हाथ मंजूरी दी है। पूर्ववर्ती सरकार के समय इस वर्ग के बच्चों को स्कूटी का वितरण नहीं हुआ था। पिछली सरकार के शासन की बकाया 16 हजार स्कूटियों का वितरण वर्तमान सरकार के शासन में हुआ है। राजस्थान में अतिपिछडा वर्ग (एमबीसी) को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण के कारण ही इस वर्ग के युवा भी प्रशासनिक अधिकारी बन रहे हैं। राजस्थान में गडरिया और उसकी विभिन्न नामधारी उप जातियों की जनसंख्या का अनुमान चालीस लाख है, लेकिन अभी तक इस जाति का राजनैतिक प्रतिनिधित्व लगभग शून्य है, ना कोई सांसद ना विधायक, ना ही कोई मेयर, ना कोई जिलापरिषद अध्यक्ष बन पाया है, यह एक बहुत बडी विसंगति है। राजस्थान सरकार के कार्यकाल का आधा समय मतलब ढाई वर्ष पूर्ण हो चुका है, अब तो सरकार को चाहिए कि किसी बोर्ड या निगम की कमान हमारे समाज के किसी योग्य व्यक्ति को देकर इस समाज को भी राजनीति की मुख्यधारा में शामिल करें।
-इंजि. महेंद्र सिंह पाल
संस्थापक/अध्यक्ष, पाल बघेल गड़रिया महासभा
मो. 8114426335
राजस्थान में गडरिया समाज को भी राजनीति की मुख्यधारा में शामिल करें!
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