गडरिया पाल धनगर समाज के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए धैर्य, बुद्धि और कानून की सहायता से लड़ना होगा। छोटे-मोटे विवादों के चलते युवाओं का थानों के चक्कर लगाना और गंभीर धाराओं जैसे एससी-एसटी एक्ट का शिकार होना उनके भविष्य, शिक्षा और सरकारी नौकरियों की तैयारियों को नुकसान पहुँचा रहा है। बुजुर्ग लोगों को आगे आकर युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। इस गंभीर स्थिति से निपटने और समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए कुछ मुख्य बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। युवाओं द्वारा भारतीय संविधान, लोकतंत्र और कानून की धाराओं का अध्ययन न करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। कानून हाथ में लेने पर पुलिस प्रशासन सख्त कार्रवाई करता है, जिससे करियर की शुरूआत में ही अपराधिक इतिहास बन जाता है। समाज को लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और महाराजा यशवंतराव होलकर जैसे महान पूर्वजों की सीख और उनके धैर्य, बुद्धि व साहस को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। जब कोई युवा किसी केस में फंसता है, तो परिवार के बड़े-बुजुर्गों और समाजसेवियों को उसे बचाने के लिए कोर्ट-कचहरी और वकीलों पर भारी पैसा खर्च करना पड़ता है। इससे परिवार आर्थिक रूप से पीछे चला जाता है। समाज के युवाओं को अपनी ऊर्जा आपसी लड़ाई-झगड़े में बर्बाद करने के बजाय पढ़ाई, सरकारी नौकरियों की तैयारी और मेहनत-लगन से अपना भविष्य बनाने में लगानी चाहिए। हमसे जुड़ने और इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अवश्य संपर्क करें। यदि आप इस मुहिम को धरातल पर ले जाने के लिए समाज के बीच कोई जागरूकता बैठक या लीगल अवेयरनेस कैंप (कानूनी जागरूकता शिविर) आयोजित करना चाहते हैं, तो मुझे बताएं। मैं उसके लिए एक बेहतरीन आमंत्रण पत्र या भाषण तैयार करने में आपकी मदद कर सकता हूँ।
-शरद पाल, प्रदेश संगठन मंत्री, आल इंडिया धनगर समाज महासभा
मो. 9897332582
युवाओं को आगे बढ़ने के लिए धैर्य, बुद्धि और कानून की सहायता से लड़ना होगा!
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